शासकीय भूमि निजी नाम पर दर्ज होने की नौबत, जांच में गड़बड़ी उजागर—पटवारी पर गिरी गाज
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अंबिकापुर/सरगुजा। शासकीय मद की भूमि को नियमों के विपरीत निजी मद में दर्ज करने की स्थिति बनने और राजस्व जांच में गंभीर लापरवाही बरतने के मामले में सरगुजा जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। कलेक्टर ने हल्का पटवारी सुरेश कुमार डाहिरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच में मौके का निरीक्षण किए बिना प्रतिवेदन तैयार करने तथा मूल राजस्व अभिलेखों से मिलान नहीं करने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं।
फोटोकॉपी के आधार पर तैयार किया प्रतिवेदन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेश कुमार डाहिरे पूर्व में तहसील लुण्ड्रा-धौरपुर अंतर्गत ग्राम लालमाटी में पदस्थ थे। वर्तमान में वे तहसील लखनपुर में कार्यरत थे। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), धौरपुर के एक राजस्व प्रकरण में खसरा नंबर 70/2 की जांच के दौरान कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ।
नायब तहसीलदार, उप तहसील रघुनाथपुर के जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया कि तत्कालीन पटवारी ने मौके पर जाकर वास्तविक कब्जेदार की पुष्टि नहीं की। वहीं, मूल अभिलेखों से मिलान किए बिना आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की छायाप्रति के आधार पर स्थल जांच प्रतिवेदन एवं पंचनामा तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया। इस प्रक्रिया के कारण शासकीय मद की भूमि निजी व्यक्ति के नाम दर्ज होने की स्थिति उत्पन्न हुई।
नोटिस का जवाब नहीं मिला संतोषजनक
मामले में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए पटवारी को 11 सितंबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने 15 सितंबर 2026 को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन प्रशासन ने उसे संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई
कलेक्टर ने संबंधित कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 का उल्लंघन मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबन आदेश जारी किया। निलंबन अवधि में पटवारी का मुख्यालय तहसीलदार कार्यालय, लखनपुर निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
राजस्व अभिलेखों में भूमि के मद परिवर्तन जैसे संवेदनशील मामलों में नियमानुसार स्थल निरीक्षण, मूल दस्तावेजों का सत्यापन और तथ्यात्मक जांच आवश्यक है। प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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