September 26, 2026

सत्या घनश्याम इजारदार प्रकरण में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल!शिकायतकर्ता अजय साहू के आधार पर चला पूरा मामला, जांच टीम से लेकर अधिकारियों तक पर उठे गंभीर सवाल

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सारंगढ़-बिलाईगढ़ barmkela// ग्राम पंचायत सहजपाली के सरपंच सत्या घनश्याम इजारदार से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप और उसके बाद की जांच प्रक्रिया ने पूरे जनपद पंचायती तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पत्रकार अजय साहू द्वारा पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40(ग) के तहत की गई शिकायत पर जो कार्यवाही शुरू हुई, वह बाद में भ्रष्टाचार, पक्षपात और राजनीतिक दबाव के खेल में उलझती चली गई। इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनपद पंचायत बरमकेला के भीतर किस तरह सत्ता, पैसे और सियासी दबाव मिलकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

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शिकायत से जांच तक—सत्य उजागर करने की जगह बचाव में जुटी टीम?

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पत्रकार अजय साहू ने पिछले कार्यकाल और वर्तमान दोनों में सरपंच सत्या घनश्याम इजारदार पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर धारा 40(ग) के तहत लिखित शिकायत जनपद पंचायत बरमकेला को सौंपी थी। इसके बाद सीईओ द्वारा जांच टीम गठित कर ग्राम पंचायत सहजपाली में जांच की गई।

लेकिन यहां से पूरा मामला संदिग्ध होने लगता है। ग्रामीणों के अनुसार, जांच टीम ने मौके पर सत्य परिस्थितियों को दबाने की कोशिश की और आरोपों की जांच की जगह सरपंच इजारदार को बचाने का प्रयास किया। यह भी चर्चा है कि जांच टीम और सरपंच के बीच आर्थिक लेनदेन हुआ, जो स्वयं में गंभीर अपराध है।


40(ग) की शिकायत को मोड़कर 92 में बदल दिया गया—न्याय प्रक्रिया में बड़ा खेल

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि धारा 40(ग) के तहत की गई शिकायत को जनपद सीईओ द्वारा बिना कारण बताए धारा 92 में परिवर्तित कर दिया गया और फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई।

धारा 40(ग) जहाँ सीधे पद से हटाने की प्रक्रिया से जुड़ी है, वहीं धारा 92 केवल वसूली तक सीमित है।
यह परिवर्तन स्पष्ट रूप से सरपंच को बचाने की मंशा दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के कुछ नेताओं ने सीईओ पर दबाव बनाकर कहा कि जांच में दोष सिद्ध होने पर धारा 40(ग) का ही पालन होना चाहिए। इसके बाद सीईओ ने SDM कार्यालय में धारा 40(ग) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया।


SDM की कार्यवाही, नोटिस जारी और फिर ‘पुनः जांच’ का नया खेल

प्रकरण SDM कार्यालय में कुछ महीनों तक चला, जिसके बाद SDM ने सत्या घनश्याम इजारदार को नोटिस जारी किया कि क्यों न उन्हें पद से मुक्त किया जाए।

लेकिन सरपंच की ओर से वकील के माध्यम से पुनः जांच की मांग की गई। आश्चर्य की बात यह कि वही जांच टीम—जिसकी निष्पक्षता पहले ही सवालों में थी—दुबारा गठित की गई।

जांच टीम ने दूसरी बार रिपोर्ट में इजारदार को निराधार रूप से निर्दोष बताकर रिपोर्ट SDM कार्यालय भेज दी।


सबसे बड़ा सवाल—अजय साहू की शिकायत पर ही क्यों खेला गया पूरा खेल?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि जिस अजय साहू की शिकायत के आधार पर यह पूरी जांच प्रक्रिया शुरू हुई, उसी शिकायत को अधिकारियों ने मोड़ने, दबाने और लीपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

जनपद पंचायत बरमकेला के अधिकारियों, जांच टीमों और राजनीतिक हस्तक्षेप ने यह साबित कर दिया कि व्यवस्था के भीतर ‘‘सत्य’’ नहीं बल्कि ‘‘सत्ता’’ और ‘‘संपत्ति’’ की चलती है।

यह सवाल आज भी कायम है—

क्या जांच टीम ने आर्थिक लाभ के कारण गलत प्रतिवेदन दिया?

क्या राजनीतिक दबाव न्यायिक प्रक्रिया पर भारी पड़ गया?

क्या ऐसी ही लीपापोती अन्य ग्राम पंचायतों में भी जारी है?

क्या जनपद पंचायत के भीतर भ्रष्टाचार का ऐसा जाल मौजूद है जो हर शिकायत को दबा देता है?


उचित कार्रवाई की मांग—व्यवस्था में विश्वास बहाल करना जरूरी

पत्रकार अजय साहू ने इस पूरे प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और भ्रष्टाचार में शामिल लोगों पर कड़ी दंडात्मक प्रक्रिया की मांग की है। ग्रामीण भी अब खुलकर कह रहे हैं कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो यह जनपद प्रशासन की पारदर्शिता पर गहरा धब्बा होगा।

यह मामला केवल एक सरपंच या एक शिकायत का नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। यदि आज इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और भी बेखौफ होता जाएगा।


यह ताबड़तोड़ खुलासा मांग करता है कि शासन-प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करे और पंचायती राज व्यवस्था को जनता के भरोसे के अनुरूप बनाए।

 

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