15 अगस्त पर बड़ा सवाल: देश आजाद, लेकिन क्या कुछ अफसर आज भी सरपंच-सचिव के प्रभाव में?
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शिकायतों पर महीनों से जांच लंबित होने का दावा, जांच रिपोर्ट के लिए RTI की कतार में शिकायतकर्ता क्यों?
सारंगढ़ बिलाईगढ़ रायगढ़ जिला 15 अगस्त को देश स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। तिरंगा लहराएगा और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया जाएगा। लेकिन इसी अवसर पर प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक गंभीर सवाल सामने आता है—क्या देश अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हो गया, लेकिन कहीं-कहीं आम शिकायतकर्ता आज भी सरकारी दफ्तरों की प्रक्रियाओं में उलझा हुआ है?
यह सवाल किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि की व्यक्तिगत निष्ठा पर नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर है।
शिकायतों पर महीनों से जांच लंबित होने का दावा
शिकायतकर्ताओं के अनुसार पंचायत संबंधी विभिन्न मामलों में धारा 40(ग़) और धारा 92 के तहत प्रस्तुत शिकायतों पर जांच एवं जांच प्रतिवेदन की स्थिति लंबे समय से स्पष्ट नहीं हो सकी है।
शिकायतकर्ताओं द्वारा जिन कार्यालयों का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें जनपद पंचायत डभरा, पुसौर, रायगढ़, घरघोड़ा, बरमकेला, अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) सारंगढ़-बिलाईगढ़, घरघोड़ा एवं रायगढ़ तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत रायगढ़ जैसे कार्यालय शामिल हैं।
हालांकि, इन सभी मामलों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी। इसलिए प्रत्येक मामले में शिकायत की तारीख, जांच आदेश, जांच अधिकारी, जांच की वर्तमान स्थिति और कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण है।
सबसे बड़ा सवाल—जांच हुई तो जांच प्रतिवेदन कहां है?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब वे अपनी शिकायत की स्थिति या जांच रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगते हैं, तो कभी-कभी उन्हें “RTI लगाइए, जानकारी ले लीजिए” जैसे जवाब मिलने की बात सामने आती है।
यहीं से सवाल उठता है—
- शिकायत पर जांच कब शुरू हुई?
- जांच अधिकारी कौन है?
- जांच पूरी हुई या नहीं?
- यदि पूरी हुई तो जांच प्रतिवेदन कहां है?
- यदि लंबित है तो देरी का कारण क्या है?
- फाइल वर्तमान में किस अधिकारी के पास है?
- कार्रवाई की अपेक्षित समय-सीमा क्या है?
यदि जांच पूरी हो चुकी है, तो शिकायतकर्ता को उसकी स्थिति और की गई कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। यदि जांच लंबित है, तो देरी का कारण और वर्तमान स्थिति भी स्पष्ट की जानी चाहिए।
पुसौर जनपद CEO के कथित बयान पर भी सवाल
जनपद पंचायत पुसौर के CEO श्री विवेक गोस्वामी से संबंधित एक कथित बातचीत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार जानकारी मांगने पर कथित तौर पर कहा गया—“जानकारी के लिए सूचना का अधिकार आए हैं, इंतजार कीजिए।”
यदि यह कथन सही है, तो प्रशासनिक पारदर्शिता के दृष्टिकोण से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित शिकायत की जांच किस स्तर पर है और जांच प्रतिवेदन तैयार हुआ है अथवा नहीं।
यह आरोप नहीं, बल्कि संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर जवाब मांगने का विषय है।
क्या RTI ही हर शिकायत की जानकारी का अंतिम रास्ता है?
RTI नागरिकों को सरकारी रिकॉर्ड एवं सूचना प्राप्त करने का महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार देता है। लेकिन मूल प्रश्न यह है कि जब कोई व्यक्ति पहले ही किसी शिकायत पर कार्रवाई की मांग कर चुका है, तो उस शिकायत की जांच की वर्तमान स्थिति जानने के लिए क्या उसे हर बार अलग से RTI प्रक्रिया में जाना चाहिए?
यदि जांच रिपोर्ट तैयार होकर सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुकी है, तो उसके अस्तित्व और कार्रवाई की स्थिति के संबंध में स्पष्ट जवाबदेही क्यों नहीं होनी चाहिए?
RTI सूचना प्राप्त करने का कानूनी माध्यम है, लेकिन शिकायतों के निस्तारण और शिकायतकर्ता को प्रक्रिया की स्थिति बताने की प्रशासनिक जिम्मेदारी का प्रश्न अलग है।
सरपंच-सचिव के प्रभाव का सवाल—रिकॉर्ड से होना चाहिए जवाब
सरपंच जनता का निर्वाचित प्रतिनिधि है और सचिव पंचायत प्रशासन का हिस्सा है। दोनों की अपनी-अपनी निर्धारित भूमिकाएं हैं।
लेकिन यदि किसी शिकायतकर्ता को यह महसूस हो कि उसकी शिकायत पर कार्रवाई के बजाय उसे बार-बार आवेदन और RTI की प्रक्रिया में भेजा जा रहा है, तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
इसलिए असली सवाल यह होना चाहिए—
“सरकारी फाइल में नियम बड़ा है या किसी व्यक्ति का प्रभाव?”
यदि किसी शिकायत में आरोप गलत हैं, तो जांच कर स्पष्ट किया जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई हो। और यदि जांच जारी है, तो उसकी वर्तमान स्थिति एवं समय-सीमा बताई जाए।
15 अगस्त पर प्रशासन से जनता के सीधे सवाल
स्वतंत्रता का अर्थ केवल तिरंगा फहराना नहीं, बल्कि कानून का राज, निष्पक्ष प्रशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता भी है।
इसलिए 15 अगस्त के अवसर पर जनता के ये सवाल प्रशासन के सामने रखे जाने चाहिए—
क्या शिकायतकर्ता को जांच रिपोर्ट के लिए महीनों इंतजार करना चाहिए?
क्या हर जांच की जानकारी के लिए RTI लगाना जरूरी है?
यदि जांच पूरी हो चुकी है तो जांच प्रतिवेदन कहां है?
यदि जांच लंबित है तो जिम्मेदार अधिकारी कौन है?
महीनों की देरी का कारण क्या है?
और सबसे बड़ा सवाल—
“अगर शिकायत पर जांच ही नहीं होगी, तो शिकायतकर्ता जाए तो जाए कहां?”
अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप की नहीं, बल्कि दस्तावेजी पारदर्शिता की है।
संबंधित जनपद पंचायतों, अनुविभागीय कार्यालयों और जिला पंचायत को प्रत्येक मामले में यह स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायत कब प्राप्त हुई, जांच आदेश कब जारी हुआ, जांच अधिकारी कौन नियुक्त हुआ, जांच पूरी हुई या नहीं, जांच प्रतिवेदन कब तैयार हुआ और उसके बाद क्या कार्रवाई की गई।
15 अगस्त पर यही सवाल—देश आजाद है, तो प्रशासनिक जवाबदेही भी आजाद और पारदर्शी होनी चाहिए।
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