November 1, 2026

आरटीआई और धारा 40(ग) की शिकायत पर कार्रवाई कहाँ? पुसौर जनपद में जांच के बाद भी शिकायतकर्ता को नहीं मिली जानकारी, सीईओ से संपर्क के बावजूद जवाब न मिलने का आरोप

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पुसौर/रायगढ़। जनपद पंचायत पुसौर में सूचना का अधिकार अधिनियम एवं पंचायतों से जुड़ी शिकायतों के निराकरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्रस्तुत आवेदन पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40(ग) के तहत की गई शिकायत पर जांच दल गठित कर जांच भी कराई गई, लेकिन जांच के बाद अब तक शिकायतकर्ता को कार्रवाई अथवा जांच के निष्कर्ष से संबंधित स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस मामले को लेकर जनपद पंचायत पुसौर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं जनसूचना अधिकारी विवेक गोस्वामी से दूरभाष के माध्यम से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब शिकायत पर जांच पूरी हो चुकी है तो उसके निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई की स्थिति शिकायतकर्ता से स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है?

तीन ग्राम पंचायतों की फाइलें भी सवालों के घेरे में

शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि तीन ग्राम पंचायतों से संबंधित शिकायतों की प्रतियां एवं फाइलें जनपद पंचायत पुसौर में लंबित हैं, लेकिन उनका निराकरण अब तक नहीं हुआ है। यदि शिकायतें लंबित हैं तो उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, जांच में क्या तथ्य सामने आए और जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित अथवा की गई—इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

क्या पंचायत प्रतिनिधियों के दबाव में चल रहा है जनपद?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जनपद स्तर के प्रशासनिक अधिकारी ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिवों से जुड़े मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहे हैं? शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि ग्राम पंचायत स्तर के प्रभावशाली लोगों के दबाव में शिकायतों को लंबित रखा जा रहा है?

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और संबंधित अधिकारी एवं पंचायत प्रतिनिधियों का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि जांच वास्तव में पूरी हो चुकी है, तो जांच रिपोर्ट की स्थिति, कार्रवाई और शिकायत के निराकरण की जानकारी सार्वजनिक अथवा शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है, यह प्रशासन के लिए गंभीर सवाल है।

आरटीआई के उद्देश्य पर भी उठे सवाल

सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का अधिकार देता है। ऐसे में यदि किसी आवेदक को समय पर सूचना नहीं मिलती या उसे अपने आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है, तो इससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि जनपद पंचायत पुसौर के जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों पर स्पष्ट जवाब कब देते हैं और जांच के बाद लंबित मामलों का निराकरण कब तक किया जाता है।

सवाल सीधा है—जांच हुई तो रिपोर्ट कहाँ है? शिकायत हुई तो निराकरण कहाँ है? और आरटीआई आवेदन है तो सूचना कहाँ है?

जनपद पंचायत पुसौर के जिम्मेदार अधिकारियों को इन सवालों का स्पष्ट और दस्तावेजी जवाब देना चाहिए, ताकि शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जनता का विश्वास बना रहे।

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