September 27, 2026

सुशासन तिहार या आश्वासन शिविर? 38 में सिर्फ 4 आवेदन निपटे, रिकॉर्ड रूम पर भड़के ग्रामीण

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4 साल से बरमकेला में बंधक सरिया तहसील का रिकॉर्ड रूम, सुशासन तिहार में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा।
79 गांवों की जनता दस्तावेजों के लिए भटकने को मजबूर, प्रशासन ने फिर थमाया जुलाई तक का आश्वासन।

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सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला सरिया: छत्तीसगढ़ की साय सरकार एक तरफ जहां ‘सुशासन तिहार’ मनाकर जनता को रामराज्य का भरोसा दे रही है, वहीं सूबे के हाई-प्रोफाइल वित्त मंत्री ओपी चौधरी के गृह विधानसभा क्षेत्र में ही सरकारी ढर्रे ने सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। बीते बुधवार को जनपद पंचायत बरमकेला के ग्राम भीखमपुरा में आयोजित सुशासन तिहार शिविर महज एक रस्मी आयोजन बनकर रह गया, जहां ग्रामीणों का गुस्सा सीधे प्रशासनिक विफलता पर फूट पड़ा।

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सबसे बड़ा आक्रोश इस बात को लेकर है कि पिछले 4 साल से तहसील सरिया की स्थापना तो कर दी गई है, लेकिन आज तक इस तहसील का ‘रिकॉर्ड रूम’ (अभिलेख कोष्ठ) बरमकेला तहसील के कब्जें में बंधक बना हुआ है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के राज में जनता को एक छोटे से दस्तावेज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, जिससे नाराज ग्रामीणों ने शिविर में जमकर कड़ा रुख अपनाया और रिकॉर्ड रूम को तत्काल सरिया स्थानांतरित करने की मांग को लेकर सीधे व्यवस्था पर बड़ा हमला बोल दिया।

19 हल्के और 79 गांवों की जनता त्रस्त

सुशासन तिहार के इस कथित ‘समाधान शिविर’ में आसपास की 19 ग्राम पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण पेंशन, राशनकार्ड, आवास योजना, वन अधिकार पट्टा, नामांतरण और बेजा कब्जा जैसे बुनियादी हक की कड़ाही से मांग करने पहुंचे थे। इसी दौरान साल्हेओना के जागरूक ग्रामीण गजानंद निषाद ने आवेदन सौंपकर व्यवस्था की अमानवीय लापरवाही का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि कागजों में तो 4 साल पहले सरिया को तहसील बना दिया गया, लेकिन इसके रिकॉर्ड रूम का संचालन आज भी बरमकेला से हो रहा है।

इस प्रशासनिक विफलता के कारण सरिया तहसील के अंतर्गत आने वाले 19 पटवारी हल्का और 79 राजस्व गांवों की गरीब जनता को बंधक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। राजस्व अभिलेख, मिशल, अधिकार अभिलेख और मामूली खसरा-नक्शा के अवलोकन व प्रतिलिपि के लिए ग्रामीणों को बरमकेला का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे पीड़ितों का समय और आर्थिक संसाधन पूरी तरह बर्बाद हो रहे हैं, और विभाग के छोटे कर्मचारी भी इस ढर्रे से बेदम हो चुके हैं।

जुलाई तक का लॉलीपॉप थमाकर अपनी खाल बचा रहे जिम्मेदार

इस बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में जब स्थानीय राजस्व अमले और सरिया के नायब तहसीलदार को घेरने की कड़ाई से कोशिश की गई, तो हमेशा की तरह व्यवस्था ने टालमटोल का वही पुराना ढर्रा अपना लिया जो उनकी विफलता को छुपा सके। इस अमानवीय विफलता और भारी असंतोष के बीच, सरिया के तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने जनता के गुस्से को शांत करने के लिए एक नया कूटनीतिक ‘लॉलीपॉप’ थमा दिया।

बाकी 34 फाइलों के ढर्रे पर सस्पेंस बरकरार

तहसीलदार ने सफाई देते हुए कहा कि सरिया में जल्द ही रजिस्ट्री ऑफिस शुरू होने वाला है, इसलिए रिकॉर्ड रूम की शिफ्टिंग जुलाई के अंतिम सप्ताह तक होने की संभावना है। जनता पूछ रही है कि जो काम बीते 4 सालों में नहीं हो सका, उसे जुलाई के आखिरी हफ्ते तक टालकर अधिकारी सिर्फ अपना पल्ला झाड़ने और अपनी साख बचाने की कूटनीतिक कोशिश क्यों कर रहे हैं? अगर जुलाई में भी यह काम नहीं हुआ, तो क्या क्षेत्र की जनता इस प्रशासनिक निकम्मेपन के खिलाफ आक्रामक आंदोलन के लिए मजबूर नहीं होगी।

इस तथाकथित सुशासन तिहार शिविर की कड़वी हकीकत का अंदाजा राजस्व विभाग के आंकड़ों से ही लगाया जा सकता है। पूरे शिविर के दौरान विभाग को कुल 38 आवेदन प्राप्त हुए थे। लेकिन बड़ी-बड़ी बातें करने वाले कड़े प्रशासनिक अमले ने मौके पर महज 4 आवेदनों का ही त्वरित निस्तारण किया, जिनमें बी-1 खसरा में नाम सुधार, बसरा सुधार और अभिलेख सामान्य सुधार शामिल थे। इसके अलावा 10 किसानों को कड़े नियम के तहत डिजिटल किसान किताब का वितरण किया गया।

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