सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सैकड़ों शिक्षक रायपुर में आंदोलन में हुए शामिल, 7 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ बुलंद की आवाज
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सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेशव्यापी आह्वान पर 15 जुलाई 2026 को राजधानी रायपुर के तुता मैदान में आयोजित विशाल धरना-प्रदर्शन एवं ध्यानाकर्षण रैली में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से जिलाध्यक्ष संकीर्तन नंद के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने अपनी लंबे समय से लंबित सात सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया तथा शीघ्र समाधान की मांग की।
जिलाध्यक्ष संकीर्तन नंद ने कहा कि शिक्षक शौक से आंदोलन नहीं कर रहे हैं, बल्कि शासन की लगातार उदासीनता के कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने “मोदी की गारंटी” के तहत सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर करने और क्रमोन्नति का लाभ देने का वादा किया था, जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो संगठन भविष्य में और अधिक व्यापक एवं उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।
धरना-प्रदर्शन में शिक्षकों ने वेतन विसंगति एवं क्रमोन्नति का लाभ, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप पदोन्नति में वरिष्ठता, विभागीय टीईटी परीक्षा का आयोजन, प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना, एकल शिक्षकीय शालाओं में अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति, वीएसके ऐप की तकनीकी समस्याओं के समाधान तक वेतन नहीं रोकने, तथा युक्तिकरण के बाद प्रधान पाठकों को वित्तीय प्रभार सौंपने सहित सात सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया।
इस ऐतिहासिक आंदोलन में प्रदेश अध्यक्ष रवींन्द्र राठौर के नेतृत्व में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से प्रदेश महामंत्री मनीष डडसेना, प्रदेश पदाधिकारी बुधनी अजय, कार्यवाहक जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश भारद्वाज, लुकेश्वर प्रसाद साहू, जिला सचिव सूरज कुमार सारथी,ब्लॉक अध्यक्ष सतीश चौहान, पवन पटेल, सरयूकांत बंजारे, जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों सहित सैकड़ों शिक्षकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
आंदोलन के उपरांत फेडरेशन ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन शासन को सौंपते हुए उसकी प्रतिलिपि माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन को भी प्रेषित की। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो आगामी समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा
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