September 27, 2026

न्यायालय का सख्त फैसला: झूठे दुष्कर्म व एससी-एसटी केस में महिला को 10 साल की सजा

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मध्यप्रदेश

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दतिया, 21 अप्रैल 2026। मध्यप्रदेश के दतिया जिले से न्याय व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण और सख्त फैसला सामने आया है। दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज कराने वाली एक महिला को न्यायालय ने 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10,500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश माननीय श्री राजेश भंडारी द्वारा 16 अप्रैल 2026 को सुनाया गया।

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मामला क्या था

प्रकरण के अनुसार, वैभवी सनोरिया नामक महिला ने थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 22 सितंबर 2021 की रात उसका पड़ोसी कालीचरण उसके घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही उसने आरोपी पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया था।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पूरी की और आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामला विचाराधीन रहा, लेकिन सुनवाई के दौरान घटनाक्रम में बड़ा मोड़ आ गया।

कोर्ट में पलटा मामला

सुनवाई के दौरान फरियादिया अपने ही बयान से मुकर गई। उसने अदालत में स्वीकार किया कि रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इस खुलासे के बाद अदालत ने आरोपी कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया।

महिला के खिलाफ हुई कार्रवाई

अदालत ने इस गंभीर तथ्य को संज्ञान में लेते हुए फरियादिया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने को लेकर कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद वैभवी सनोरिया के खिलाफ नया प्रकरण दर्ज किया गया और सुनवाई के उपरांत उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 182, 195 एवं 211 के तहत दोषी पाया गया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि हाल के समय में झूठे प्रकरण दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी बढ़ता है।

अभियोजन पक्ष की भूमिका

प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा पांच गवाहों के बयान प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर अदालत ने सभी आरोपों को प्रमाणित माना और दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई।

संदेश और प्रभाव

यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है, जो निजी विवाद या अन्य कारणों से गंभीर धाराओं में झूठे आरोप लगाते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि न्याय प्रणाली के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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