June 2, 2026

फिंगेश्वर शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, बीईओ से छीने गए वित्तीय अधिकार

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फोन-पे स्क्रीनशॉट और कथित रिश्वतखोरी शिकायतों के बीच डीईओ का बड़ा आदेश, एबीईओ देवेंद्र सिंह बहल को सौंपी गई जिम्मेदारी

गरियाबंद/फिंगेश्वर। फिंगेश्वर शिक्षा विभाग में लंबे समय से चल रहे विवादों और विभिन्न शिकायतों के बीच जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) गरियाबंद ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) फिंगेश्वर के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए हैं। विभागीय आदेश के तहत अब आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ) संबंधी समस्त वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह बहल को आगामी आदेश तक सौंप दी गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 1 जून 2026 को जारी आदेश में पूर्व में सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी हेमंत कुमार साहू को दिए गए वित्तीय अधिकारों को निरस्त करते हुए यह दायित्व देवेंद्र सिंह बहल को सौंपा गया है। आदेश जारी होते ही विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

सूत्रों के अनुसार फिंगेश्वर शिक्षा विभाग पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के केंद्र में रहा है। विभागीय कार्यप्रणाली, शासकीय कार्यों से जुड़े कथित फोन-पे स्क्रीनशॉट मामले तथा रिश्वतखोरी संबंधी शिकायतों को लेकर उच्च अधिकारियों तक शिकायतें पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि इन मामलों की आधिकारिक पुष्टि अथवा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन शिकायतों के बाद विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज होने की चर्चा रही है।

शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि वित्तीय अधिकारों में किया गया यह बदलाव प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और वित्तीय कार्यों पर नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। वहीं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन मामलों को लेकर शिकायतें की गई हैं, उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि फिंगेश्वर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी कई सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में डीईओ द्वारा जारी यह नया आदेश विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल सभी की नजर आगे होने वाली जांच और संभावित प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

(नोट: कथित रिश्वतखोरी एवं अन्य शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित मामलों में विभागीय जांच अथवा आधिकारिक निष्कर्ष की प्रतीक्षा है।)

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