September 27, 2026

कागजों में विकास, जमीन पर विनाश — पंचायत में भ्रष्टाचार का खुला खेल!”

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जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ बरमकेला -क्षेत्र के कई गांवों में आज विकास के नाम पर जो खेल चल रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है। सरकारी योजनाओं का पैसा जहां गरीबों और मजदूरों के हक के लिए भेजा जाता है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मनरेगा जैसी योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार देना है, आज भ्रष्टाचार का अड्डा बनती जा रही है।
गांवों में हालात ऐसे हैं कि मजदूरों के नाम पर काम दिखाया जाता है, लेकिन असल में काम मशीनों से करवाया जा रहा है। JCB और बड़े-बड़े उपकरणों से काम पूरा कर लिया जाता है, और कागजों में दर्ज होता है कि मजदूरों ने दिन-रात मेहनत की। इससे न सिर्फ मजदूरों का हक छीना जा रहा है, बल्कि सरकार की योजना का भी खुला मजाक उड़ाया जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तालाब, सड़क और अन्य निर्माण कार्य फाइलों में पूरी तरह सफल दिखाए जाते हैं, लेकिन जब मौके पर जाकर देखा जाए तो सच्चाई कुछ और ही होती है। कई जगह तालाब सूखे पड़े हैं, अधूरे काम नजर आते हैं, और कहीं-कहीं तो काम शुरू ही नहीं हुआ — फिर भी भुगतान पूरा निकाल लिया गया।
गांव के लोग जब इस पर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है। शिकायत करने पर धमकी, दबाव और अनदेखी आम बात हो गई है। ऐसा लगता है जैसे भ्रष्टाचार अब सिस्टम का हिस्सा बन चुका है, और ईमानदारी एक मजाक बनकर रह गई है।
सरपंच, सचिव और जिम्मेदार अधिकारी — जिन पर गांव के विकास की जिम्मेदारी होती है — वही इस खेल में शामिल नजर आते हैं। जनता का पैसा, जनता तक पहुंचने से पहले ही कहीं और गायब हो जाता है। गरीब मजदूर, जो दो वक्त की रोटी के लिए इस योजना पर निर्भर हैं, उन्हें काम भी नहीं मिलता और नाम भी इस्तेमाल हो जाता है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक यह खेल चलता रहेगा? कब तक गांव के लोग यूं ही लुटते रहेंगे? और कब तक जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे रहेंगे?
गांव की जनता अब धीरे-धीरे जाग रही है। लोग सवाल पूछ रहे हैं, आवाज उठा रहे हैं और अपने हक के लिए लड़ने को तैयार हैं। अगर समय रहते इस भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में यह जनआक्रोश बड़ा रूप ले सकता है।
अब जरूरत है कार्रवाई की, न कि सिर्फ आश्वासन की।
अब जरूरत है पारदर्शिता की, न कि फाइलों में दिखावे की।
“अगर भ्रष्टाचार बंद नहीं हुआ, तो जनता अब चुप नहीं बैठेगी… हिसाब लेकर रहेगी!”

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