September 26, 2026

मामा–भांजा की आपराधिक तिकड़ी का आतंक: पत्रकार दम्पत्ति को जान से मारने की धमकी, हत्या की साजिश के ठोस सबूत; पुलिस की ढिलाई से अपराधियों के हौसले बुलंद

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बिलासपुर।बिलासपुर जिले में निर्भीक पत्रकारिता को कुचलने की एक बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई है। कोयला साइडिंग, कोल वॉशरी और कोल डिपो से जुड़े समाचारों के प्रकाशन से बौखलाए आपराधिक प्रवृत्ति के मामा–भांजा की तिकड़ी ने एक पत्रकार दम्पत्ति को खुलेआम जान से मारने की धमकी दी है। आरोप है कि सोशल मीडिया ग्रुप में अश्लील गाली-गलौच, घर में घुसकर हत्या करने की धमकी, अवैध बंदूक–पिस्तौल दिखाकर डराने और साजिश रचने जैसे गंभीर कृत्य किए गए। इसके बावजूद पुलिस द्वारा गैर-जमानतीय धाराएं नहीं लगाए जाने से अपराधियों के हौसले और बढ़ गए हैं।

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जयरामनगर निवासी डी.पी. गोस्वामी, जो दैनिक नया इंडिया, न्यू इंडिया टाइम्स वेबसाइट एवं एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक पोर्टल के ब्यूरो चीफ हैं, तथा उनकी धर्मपत्नी दिव्या पुरी गोस्वामी (पत्रकार) ने इस संबंध में थाना मस्तूरी में नामजद शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों संजय पांडेय, विकास तिवारी और अनुराग तिवारी (निवासी जयरामनगर, थाना मस्तूरी, जिला बिलासपुर) ने कोयला कारोबार से जुड़े समाचारों के प्रकाशन से क्षुब्ध होकर पत्रकार दम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने की सुपारी ली और लगातार धमकियां दे रहे हैं।

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समाचार से बौखलाहट, सुपारी और साजिश
पत्रकार दम्पत्ति द्वारा कोल वॉशरी, कोल साइडिंग, कोल डिपो, संबंधित कंपनियों, प्रभावशाली व्यक्तियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर तथ्यात्मक कवरेज किया गया था। प्रभावित ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों व चिंताओं को भी समाचार में स्थान दिया गया। इसी से आहत होकर कथित तौर पर कोल कारोबार से जुड़े तत्वों ने संजय पांडेय व उसके दोनों भांजों को पत्रकार दम्पत्ति के खिलाफ उकसाया। आरोप है कि ये लोग सोशल मीडिया से लेकर प्रत्यक्ष रूप से घर के सामने आकर धमकी देते रहे हैं और गोस्वामी परिवार को अपमानित करने का माहौल बना रहे हैं।

एफआईआर दर्ज, पर धाराएं मामूली
थाना मस्तूरी में पत्रकार दम्पत्ति के खिलाफ हुई आपराधिक घटनाओं पर दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं—
• अपराध क्रमांक 415/2025 (दिनांक 26.06.2025)
• अपराध क्रमांक 548/2025 (दिनांक 28.05.2025)
इनमें भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 79, 35 लगाई गई। पीड़ितों का आरोप है कि गंभीर तथ्यों, जानलेवा धमकियों, साजिश और हथियार दिखाने जैसे कृत्यों के बावजूद गैर-जमानतीय धाराएं नहीं जोड़ी गईं, जिससे आरोपियों का मनोबल बढ़ा।

‘बीजापुर के पत्रकार जैसा हाल करेंगे’—खुली धमकी
पीड़ितों के अनुसार, दिवाली के दौरान 17 से 19 अक्टूबर 2025 के बीच आरोपियों ने घर के सामने गाली-गलौच करते हुए धमकी दी कि “तुम्हारा हाल भी बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर जैसा करेंगे।” 19 अक्टूबर 2025 की रात करीब 9–10 बजे, संजय पांडेय की पटाखा दुकान के पास से साजिशन गुजरते हुए घर के सामने रुककर फिर धमकियां दी गईं। इससे पहले भी कई बार असफल साजिशें रची जा चुकी हैं और लगातार भय का वातावरण बनाया जा रहा है।

परिवार भय में, सबूत मौजूद
लगातार जानलेवा धमकियों और साजिशों के कारण गोस्वामी दम्पत्ति भय और असुरक्षा के साए में जीवन जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि उनके पास ऑडियो–वीडियो सहित दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। आरोप है कि आरोपी दबाव बनाकर प्रकरण में समझौता कराना चाहते हैं।

आपराधिक इतिहास के बावजूद सख्ती नहीं
संजय पांडेय और उसके दोनों भांजों के विरुद्ध पत्रकार दम्पत्ति की शिकायत पर तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त, अन्य पीड़ितों द्वारा भी 8–10 शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। इसके बावजूद, पूर्व में भी मामूली धाराएं लगने से आरोपी श्रृंखलाबद्ध अपराध करते आ रहे हैं, जबकि उनके कृत्य गंभीर और अजमानतीय प्रकृति के बताए गए हैं।

एसपी ने माना गंभीर, पर अमल नहीं
बताया गया है कि बिलासपुर एसपी ने पत्रकार दम्पत्ति की शिकायत को बेहद गंभीर मानते हुए एसडीओपी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी प्रभावी और सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उच्चाधिकारियों से गुहार
पत्रकार दम्पत्ति डी.पी. गोस्वामी और दिव्या गोस्वामी ने गृहमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, डीजीपी, आईजी बिलासपुर और बिलासपुर एसपी को विस्तृत शिकायत देकर आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई, गैर-जमानतीय धाराएं जोड़ने, तथा पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

यह मामला न केवल पत्रकारों की सुरक्षा बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह निर्भीक पत्रकारिता पर खतरनाक नज़ीर बन सकता है।

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