गोबरसिंहा:शासकीय डॉक्टर की ‘निजी सिंचाई’! सरकारी सेवा के साथ खेत में तालाब का पानी—बिना अनुमति मोटर चलाने का आरोप
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गोबरसिंहा/बरमकेला। ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरमकेला में पदस्थ चिकित्सा विभाग के डॉक्टर डॉ. हरिशंकर (मुन्ना) पटेल, पिता स्व. रामदयाल पटेल को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि शासकीय सेवा में पदस्थ होने के बावजूद वे कृषि कार्य भी करते हैं और अपने निजी खेत की सिंचाई के लिए गांव के टार तालाब के पानी का उपयोग कर रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार तालाब में पर्याप्त मात्रा में पानी भरा हुआ है, जिसका उपयोग कथित रूप से निजी खेत की सिंचाई के लिए किया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि देर रात तालाब से मोटर के माध्यम से पानी निकालकर खेतों में सिंचाई किए जाने की बात सामने आई है। साथ ही, विद्युत विभाग की अनुमति अथवा वैध विद्युत कनेक्शन से संबंधित नियमों का पालन हुआ है या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि संबंधित व्यक्ति शासकीय स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ कर्मचारी हैं। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि सरकारी तालाब के पानी का निजी कृषि कार्य के लिए बिना अनुमति उपयोग किया गया अथवा बिजली का अवैध रूप से उपयोग किया गया, तो यह केवल तालाब के पानी के दुरुपयोग का मामला नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित विभागों के नियमों के उल्लंघन का भी विषय बन सकता है।
जांच हुई तो खुल सकता है पूरा मामला
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब सार्वजनिक उपयोग और सामुदायिक हित से जुड़ा संसाधन है। ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा इसका निजी लाभ के लिए उपयोग किया जाना उचित है या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित डॉक्टर को निजी कृषि कार्य के लिए तालाब का पानी उपयोग करने की अनुमति प्राप्त है? क्या मोटर संचालन के लिए विद्युत विभाग की वैध अनुमति और कनेक्शन है? यदि अनुमति नहीं है तो रात के समय मोटर चलाकर पानी निकालने की शिकायत पर संबंधित विभाग अब क्या कार्रवाई करेगा?
जिम्मेदार विभागों से जांच और कार्रवाई की मांग
मामले में ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जल संसाधन/संबंधित विभाग तथा विद्युत विभाग को मौके का निरीक्षण कर मोटर, विद्युत कनेक्शन, तालाब से पानी निकासी और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को भी यह देखना चाहिए कि शासकीय सेवा में पदस्थ कर्मचारी द्वारा निजी कृषि गतिविधि से संबंधित कोई सेवा नियम प्रभावित तो नहीं हो रहा है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई और सार्वजनिक संसाधन के कथित दुरुपयोग की भरपाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही, यदि विद्युत नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो विद्युत विभाग को अपने नियमानुसार अलग से कार्रवाई करनी चाहिए।
सच क्या है, यह निष्पक्ष जांच से सामने आएगा—लेकिन सवाल इतना जरूर है कि सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति को क्या सार्वजनिक तालाब का पानी निजी खेत की सिंचाई के लिए इस्तेमाल करने की छूट है?
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