गोबरसिंहा में कुष्ठ जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, लोगों को दी गई बीमारी से बचाव और उपचार की जानकारी
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बरमकेला/सारंगढ़-बिलाईगढ़।जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम गोबरसिंहा में सोमवार को “दी लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया” द्वारा कुष्ठ जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मिशन ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक करते हुए इसके लक्षण, बचाव और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर लोगों को जागरूक बनाना रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मिशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि कुष्ठ रोग एक सामान्य बीमारी है, जिसका समय पर इलाज कराने से पूरी तरह उपचार संभव है। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव के कारण लोग इस बीमारी को छिपाने का प्रयास करते हैं, जिससे रोग बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में जागरूकता अभियान बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि शरीर में सुन्नपन, त्वचा पर सफेद या लाल धब्बे, हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित दवा लेने से रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है। साथ ही कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के साथ भेदभाव न करने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की अपील भी की गई।
दी लेप्रोसी मिशन ट्रस्ट इंडिया के प्रतिनिधियों ने कहा कि संस्था लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रही है। इसके माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि कुष्ठ रोग कोई अभिशाप नहीं बल्कि एक सामान्य बीमारी है, जिसका इलाज संभव है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह भी दी गई।
ग्रामीणों ने भी कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वास्थ्य संबंधी कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल भाषा में जवाब दिया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों को कुष्ठ रोग से बचाव संबंधी जानकारी पत्रक वितरित किए गए तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता शिविर आयोजित करने की बात कही गई।
इस जनजागरूकता कार्यक्रम से ग्रामीणों में सकारात्मक संदेश पहुंचा और लोगों ने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संकल्प लिया। क्षेत्र के लोगों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार होने चाहिए, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े और समाज से भेदभाव की भावना समाप्त हो सके
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