May 17, 2026

“नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली का आरोप: गरियाबंद स्वास्थ्य विभाग की संविदा भर्ती प्रक्रिया सवालों के घेरे में”

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जिला ब्यूरो चीफ  -ओंकार शर्मा

ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट सामने आने का दावा, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

गरियाबंद

जिले का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। संविदा भर्ती प्रक्रिया में कथित पैसों के लेनदेन और नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली के आरोपों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में ऑडियो रिकॉर्डिंग, मोबाइल चैट और स्क्रीनशॉट सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद पूरे जिले में चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई संविदा भर्ती प्रक्रिया में चयन सूची में नाम शामिल कराने के लिए कुछ अभ्यर्थियों से पैसों की मांग की गई थी। आरोप है कि सरकारी अस्पताल में पदस्थ एक ओटी टेक्नीशियन ने मोबाइल पर हुई बातचीत में स्वयं यह स्वीकार किया कि उसे “ऊपर से” पैसे लेने के लिए कहा गया था। वायरल हो रही कथित बातचीत में गरियाबंद सीएमएचओ कार्यालय का नाम लिए जाने की भी चर्चा है।

मामले के सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या सरकारी कर्मचारी नौकरी लगवाने के नाम पर पैसों का लेनदेन कर सकते हैं? यदि आरोप सही हैं तो क्या इसमें केवल कर्मचारी शामिल हैं या फिर विभाग के कुछ बड़े अधिकारी भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा हैं?

स्थानीय लोगों और अभ्यर्थियों में इस मामले को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही तो योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा और विभाग की विश्वसनीयता पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले जिले में पटवारी और पुलिस विभाग से जुड़े ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हुई थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस गंभीर मामले में अब तक किसी प्रकार की स्पष्ट जांच या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी वजह से भर्ती प्रक्रिया में धांधली और अपात्र लोगों की नियुक्ति को लेकर भी संदेह गहराता जा रहा है।

यदि सामने आए कथित ऑडियो, स्क्रीनशॉट और अन्य दस्तावेज जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला जिले के सबसे बड़े भर्ती और रिश्वत कांडों में से एक साबित हो सकता है।

फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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