September 27, 2026
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“सहजपाली पंचायत में फिर उठा भ्रष्टाचार का बवंडर: धारा 40(ग) के तहत दूसरी शिकायत ने पहली जांच पर खड़े किए सवाल”

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बरमकेला / सारंगढ़-बिलाईगढ़। जनपद पंचायत बरमकेला अंतर्गत ग्राम पंचायत सहजपाली एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के केंद्र में आ गई है। पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोपों को लेकर पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40(ग) के तहत दूसरी बार शिकायत दर्ज कराई गई है। इस दूसरी शिकायत ने न केवल पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पहली जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत बरमकेला को सौंपे गए आवेदन में ग्राम पंचायत शाहजपाली की वर्तमान सरपंच श्रीमती सत्या इजारदार एवं सचिव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पंचायत के विकास कार्यों और शासकीय योजनाओं में नियमों की अनदेखी कर सरपंच के परिजनों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंचायत निधि से संबंधित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों में सरपंच के पति को “फर्जी वेंडर” के रूप में दर्शाकर भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है।

शिकायत में यह दावा किया गया है कि पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए शासकीय राशि का लाभ निजी संबंधियों तक पहुंचाया, जो पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 40(ग) तथा धारा 92 का सीधा उल्लंघन माना जा सकता है। आवेदन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(d) का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अंतर्गत लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग कर स्वयं अथवा रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।

सबसे बड़ा सवाल अब पहली शिकायत और उसकी जांच को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि पहली शिकायत पर निष्पक्ष, पारदर्शी और ठोस जांच हुई होती, तो दूसरी बार उसी प्रकार के आरोपों के साथ नया आवेदन सामने नहीं आता। ग्रामीणों और जनचर्चाओं में यह बात लगातार कही जा रही है कि पिछली जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई और वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया गया।

कई ग्रामीणों का मानना है कि पहली जांच की प्रक्रिया शुरू से ही संदिग्ध नजर आ रही थी। आरोप है कि जांच टीम ने गंभीर बिंदुओं की गहराई से पड़ताल करने के बजाय सतही तरीके से कार्रवाई कर मामले को शांत करने का प्रयास किया। अब जब दूसरी बार विस्तृत शिकायत सामने आई है, तो यह पहली जांच की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है। पंचायत क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि आखिर किन परिस्थितियों में और किस दबाव में पहली शिकायत को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की गई।

दूसरी शिकायत में पंचायत के वर्ष 2020 से 2026 तक के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों, भुगतान, वेंडर सूची, बिल-वाउचर तथा अन्य अभिलेखों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि जिन लोगों को नियम विरुद्ध आर्थिक लाभ पहुंचाया गया है, उनसे राशि की वसूली की जाए तथा दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो।

अब निगाहें जनपद पंचायत बरमकेला और जांच टीम पर टिकी हुई हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि इस बार जांच वास्तव में निष्पक्ष होगी या फिर पिछली बार की तरह केवल कागजी खानापूर्ति कर मामले को दबाने का प्रयास किया जाएगा। पंचायत क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि दूसरी शिकायत के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे जांच तंत्र की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठेंगे।

राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में यह मामला अब तेजी से चर्चा का विषय बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत जनता के विकास और पारदर्शी शासन के लिए बनाई गई व्यवस्था है, लेकिन यदि उसी व्यवस्था में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगने लगें, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।

फिलहाल देखने वाली बात यह होगी कि जनपद पंचायत बरमकेला इस बार शिकायत को किस गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है, या फिर एक बार फिर जांच के नाम पर “लीपापोती” कर पूरे मामले को शांत करने की कोशिश की जाएगी।

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