“कानून से आंख-मिचौली खेल रहा था आरोपी, आखिरकार पुलिस की पकड़ में आया—एक माह की ‘लुका-छिपी’ का हुआ द एंड”
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रायगढ़ पुसौर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में रायगढ़ पुलिस महिला एवं नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों पर कागज़ी नहीं, ज़मीनी सख्ती दिखा रही है—और पुसौर की ताज़ा कार्रवाई इसका प्रमाण है। थाना पुसौर पुलिस ने नाबालिग से छेड़छाड़ के आरोपी को धर दबोचा, जो बीते एक महीने से कानून को “ढूंढो-ढूंढो” खेल खिलाकर फरार था।
पीड़िता की शिकायत 28 दिसंबर 2025 को दर्ज हुई थी। आरोप था कि स्कूल आने-जाने के दौरान मनोज खड़िया नामक युवक पीछा करता, अश्लील इशारे करता और 27 दिसंबर को हद पार करते हुए मोबाइल नंबर मांगकर हाथ पकड़ लिया। विरोध होते ही आरोपी मौके से रफूचक्कर—यानी हिम्मत दिखी तो सिर्फ भागने में। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की।
घटना के बाद आरोपी ने ठिकाने बदल-बदलकर यह मान लिया था कि शायद कानून थक जाएगा। लेकिन थाना प्रभारी रामकिंकर यादव ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखा—और रविवार को मिली एक पुख्ता सूचना ने फरारी की फिल्म का क्लाइमेक्स तय कर दिया। पुलिस टीम ने गांव में दबिश दी और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार आरोपी मनोज कुमार खड़िया (उम्र 20 वर्ष), निवासी पुसौर को विधिवत कार्रवाई के बाद न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह का साफ संदेश है—नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों में देरी नहीं, ढिलाई नहीं। सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई हो और समयसीमा में चालान पेश किया जाए।
व्यंग्य यही है:
जो आरोपी खुद को “चालाक” समझकर एक महीने तक छुपता रहा, वह आखिरकार समझ गया—कानून के साथ आंख-मिचौली में जीत कभी भी आरोपी की नहीं होती।
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