“आस्था के रास्ते पर आरटीओ का ‘एक्शन’ या अवैध वसूली? बरमकेला–लेंध्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ी परेशानी, प्रिंट मीडिया की चुप्पी पर उठे सवाल”
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जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ बरमकेला–लेंध्रा मार्ग इन दिनों आरटीओ अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में है। ओडिशा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर के दर्शन के लिए इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन रास्ते में हो रही लगातार आरटीओ चेकिंग के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार आरटीओ अधिकारी इस मार्ग पर लगातार अभियान चलाकर वाहनों की जांच कर रहे हैं। इस दौरान कई बार श्रद्धालुओं के वाहनों को घंटों तक रोक कर रखा जाता है, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं और यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ती है। श्रद्धालुओं का आरोप है कि कई मामलों में बिना रसीद के चालानी कार्रवाई की जा रही है, जिससे यात्रियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ओडिशा से आने वाले कई श्रद्धालुओं ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि धार्मिक यात्रा के दौरान इस तरह की कार्रवाई से उनका समय और यात्रा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कई बार परिवार और बुजुर्गों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
इस पूरे मामले का असर आसपास के ढाबा और छोटे व्यवसायियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ढाबा संचालकों का कहना है कि जब इस मार्ग पर वाहनों को रोककर लंबी जांच की जाती है तो लोग इस रास्ते से गुजरने से बचने लगते हैं, जिससे उनके व्यापार पर भी असर पड़ रहा है।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में एक और बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रिंट मीडिया में इस मुद्दे को प्रमुखता से क्यों नहीं उठाया जा रहा है। लोगों के बीच चर्चा है कि जनहित से जुड़े इस मुद्दे की बजाय विज्ञापनों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है, जिससे मीडिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब क्षेत्र के लोगों और श्रद्धालुओं की मांग है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराए और यदि कहीं भी गलत तरीके से कार्रवाई या वसूली हो रही है तो उस पर सख्त कदम उठाए, ताकि आस्था के मार्ग पर श्रद्धालुओं को बेवजह परेशान न होना पड़े।
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