रंगों की आड़ में नहीं, सम्मान की डोर में बंधे रिश्तों की होली”
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रायपुर। फागुन की बयार जब गालों को छूती है, जब अबीर-गुलाल की खुशबू हवा में घुलती है, तब होली केवल रंगों का नहीं, मन के श्रृंगार का पर्व बन जाती है। लेकिन अगर यही रंग किसी की इच्छा के विरुद्ध थोपे जाएँ, तो वह उत्सव नहीं, उत्पीड़न बन जाता है।
पुलिस कमिश्नरेट रायपुर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि महिलाओं को जबरन रंग लगाना भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 के तहत अपराध है। त्योहार की मस्ती में यदि किसी ने मर्यादा की रेखा लांघी, तो कानून का रंग सबसे गाढ़ा पड़ेगा।
होली का श्रृंगार तब ही सुहाता है जब उसमें सहमति की मुस्कान हो। किसी बहन, बेटी या महिला के चेहरे पर जबरदस्ती लगाया गया रंग, उसके आत्मसम्मान पर दाग बन जाता है। यह पर्व प्रेम का है, पर प्रेम का पहला नियम है — सम्मान।
प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है। महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह संदेश केवल चेतावनी नहीं, समाज के लिए आईना है।
होली का असली अर्थ है —
मन से मन का मिलन
रिश्तों में विश्वास का रंग
और हर चेहरे पर सुरक्षित मुस्कान
अगर रंग लगाना है, तो पहले पूछिए।
अगर हँसी बाँटनी है, तो पहले भरोसा जीतिए।
“होली खेलें ✔️
कानून से न खेलें ❌”
इस बार की होली में रंगों से पहले रिश्तों को सजाइए, ताकि हर आँगन में श्रृंगार हो — और हर नारी के मन में सम्मान।
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