गरियाबंद में सर्पदंश प्रबंधन पर डॉक्टरों का विशेष प्रशिक्षण, ‘गोल्डन ऑवर’ में उपचार पर जोर
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जिला संवाददाता-ओंकार शर्मा
गरियाबंद, 20 फरवरी 2026।
जिले में सर्पदंश (Snakebite Envenoming) के मामलों में त्वरित उपचार और मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) गरियाबंद के तत्वावधान में होटल सिटी रीजेंसी में एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में जिलेभर के मेडिकल ऑफिसर्स एवं आर.एम.ए. (RMA) ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों तक सर्पदंश के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करना था, ताकि समय रहते मरीजों को सही उपचार मिल सके।
🔹 विशेषज्ञों का मार्गदर्शन
यह कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.एस. नवरत्न के निर्देशन में आयोजित किया गया। सिविल सर्जन डॉ. वाई.के. ध्रुव की विशेष उपस्थिति रही।
तकनीकी सत्रों का संचालन—
डॉ. एस.के. रेड्डी (जिला नोडल अधिकारी) ने सर्पदंश की निगरानी एवं डेटा प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी।
डॉ. राहुल नेताम (प्रशिक्षक) ने एंटी-स्नेक वेनम (ASV) के सही उपयोग, डोज एवं आपातकालीन प्रबंधन की बारीकियां समझाईं।
श्री रजत महतो (DDM, IDSP) ने रिपोर्टिंग और डेटा अपडेट की तकनीकी प्रक्रिया बताई।
🔹 प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु
न्यूरोटॉक्सिक और हेमोटॉक्सिक सर्पदंश के लक्षणों की त्वरित पहचान।
‘गोल्डन ऑवर’ (पहला एक घंटा) में मरीज को स्थिर कर सही मात्रा में ASV देने की प्रक्रिया।
गंभीर मरीजों को रेफर करने से पहले प्राथमिक उपचार और जटिलताओं का प्रबंधन।
ग्रामीण क्षेत्रों में फैली भ्रांतियों को दूर कर आधुनिक चिकित्सा पद्धति अपनाने पर जोर।
🔹 अधिकारियों का संदेश
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. यू.एस. नवरत्न ने कहा कि गरियाबंद जिले की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सर्पदंश के मामलों में समय पर इलाज अत्यंत आवश्यक है। इस प्रशिक्षण से चिकित्सा अधिकारी अधिक आत्मविश्वास के साथ फील्ड में कार्य कर सकेंगे और मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।
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