September 27, 2026

धोखाधड़ी का ‘मास्टर’ ब्लास्टर: चंदराम यादव के 67% अंकों का सच आया सामने, सरकारी सिस्टम को 18 साल तक रखा अंधेरे में…

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बलौदाबाजार/रायपुर: शिक्षा के मंदिर में बैठकर ‘असत्य’ की बुनियाद पर करियर खड़ा करने वाले शिक्षक चंदराम यादव (शिक्षक एल.बी., शा. पूर्व माध्यमिक शाला दलदली) का कच्चा चिट्ठा अब सरकारी फाइलों से बाहर आ गया है। संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय, रायपुर द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर-चांपा को जारी किए गए हालिया नोटिसों ने इस पूरे फर्जीवाड़े की कलई खोल कर रख दी है।

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​अंकों की ‘हेराफेरी’ का गणित: 1210 बनाम 880 –​विभागीय जांच और उपलब्ध दस्तावेजों (क्रमांक/सतर्कता/एफ-339/2025) के अनुसार, चंदराम यादव ने नियुक्ति पाने के लिए जो बिसात बिछाई थी, वह अब उनके गले की फांस बन गई है:

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  • ​चयन सूची का दावा: भर्ती के समय प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर चयन सूची में चंदराम के बी.एस.सी. के प्राप्तांक 1800 में से 1210 (67.22%) दर्शाए गए थे।
  • ​हकीकत का खुलासा: जब वास्तविक रिकॉर्ड खंगाला गया, तो पाया गया कि उनके वास्तविक अंक 1800 में से केवल 880 (48.88%) ही थे।
  • ​दोहरी जालसाजी: जांच में यह भी सामने आया है कि इस शिक्षक ने शिक्षाकर्मी वर्ग-02 की भर्ती के समय और कार्यभार ग्रहण करते समय अलग-अलग अंकसूचियों की प्रतियां जमा की थीं ताकि मेधावी होने का ढोंग रचा जा सके।

​शपथ ली थी ‘निष्ठा’ की, काम किया ‘जालसाजी’ का :​दस्तावेजों में शामिल चंदराम यादव के ‘शपथ पत्र’ (Oath of Allegiance) पर नजर डालें तो उन्होंने “सत्य निष्ठा से प्रतिज्ञा” की थी कि वे अपने पद का निर्वहन निष्पक्षता से करेंगे। लेकिन वास्तविकता में उन्होंने 01-07-2018 को संविलियन के समय भी अपनी वास्तविक शैक्षणिक योग्यता के तथ्यों को छुपाए रखा।

​प्रशासनिक सख्ती: अब ‘सत्यापित’ वारंट का इंतजार –​संभागीय कार्यालय रायपुर ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस अपनाते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया है:

  • ​अंतिम अल्टीमेटम: संयुक्त संचालक कार्यालय ने 08 सितंबर 2025 को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि डी.ई.ओ. जांजगीर-चांपा ने अब तक भर्ती के समय प्रस्तुत फर्जी अंकसूची की सत्यापित प्रति प्रेषित नहीं की है।
  • ​जवाबदेही तय: प्रशासन ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट अभिमत सहित मूल दस्तावेज तत्काल मांगे हैं ताकि नियमानुसार बर्खास्तगी और विधिक कार्रवाई की जा सके।
  • ​शिकायतकर्ता की मुस्तैदी: ग्राम बरेली निवासी राजेन्द्र कुमार यादव की निरंतर शिकायतों और साक्ष्यों ने इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े को अंजाम तक पहुँचाया है।

​बड़ा सवाल : 18 साल तक कहाँ था तंत्र? –​चंदराम यादव की प्रथम नियुक्ति 16-07-2007 को हुई थी। सवाल यह उठता है कि जिला पंचायत जांजगीर-चांपा और शिक्षा विभाग का सत्यापन तंत्र करीब 18 वर्षों तक क्या सो रहा था? कैसे एक शिक्षक फर्जी आंकड़ों के दम पर पदोन्नति और संविलियन का लाभ लेता रहा?

​विभागीय हलचल: फिलहाल इस खुलासे के बाद कसडोल विकासखंड सहित पूरे रायपुर संभाग में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही शिक्षक की सेवा समाप्ति के साथ-साथ धोखाधड़ी की एफ.आई.आर. (FIR) भी दर्ज कराई जा सकती है।

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