September 27, 2026

अब नहीं चलेगा सरकारी नौकरी का मुखौटा और बाजार का जुआ, छत्तीसगढ़ सरकार ने ट्रेडिंग को माना अपराध…!”

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय सेवा में व्याप्त बाजारिया लत, सट्टेबाज़ी और क्रिप्टो की हवस पर अब सीधा हथौड़ा चला दिया है। राज्य शासन ने आज ‘राजपत्र (क्रमांक 516)’ में ऐलान करते हुए सरकारी कर्मचारियों द्वारा शेयर, क्रिप्टो, और डेरिवेटिव ट्रेडिंग को ‘अवचार’ यानी सेवा नियमों का उल्लंघन घोषित कर दिया है।

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यह कदम उन ‘दोहरी ज़िंदगी’ जीने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सीधा युद्ध है – जो एक तरफ सरकारी वेतनभोगी हैं और दूसरी ओर मुनाफे की हवस में इन्ट्राडे, BTST, ऑप्शंस और क्रिप्टो बाज़ार में जुएबाज़ बन चुके हैं।

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साफ संदेश : सरकारी नौकरी या सट्टा – दोनों नहीं चलेगा : सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस अधिसूचना के अनुसार अब :

“शेयरों, प्रतिभूतियों, डिबेंचर्स, म्युचुअल फंड्स और क्रिप्टोकरेंसी में बार-बार खरीद-बिक्री, इन्ट्राडे ट्रेडिंग, फ्यूचर-ऑप्शन और BTST जैसी गतिविधियाँ ‘अवचार’ यानी अनुशासनहीनता मानी जाएगी।”

यानी अब यदि कोई क्लर्क, पटवारी, इंजीनियर, अफसर या कोई भी शासकीय सेवक शेयर ट्रेडिंग में लिप्त पाया गया तो उसे सिर्फ फटकार नहीं, नौकरी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।

क्यों लिया गया ये फैसला : सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार :

  • कई कर्मचारियों के ऑफिस टाइम में ट्रेडिंग एप्स पर सक्रिय रहने की पुष्टि हुई।
  • कुछ अधिकारियों के क्रिप्टो पोर्टफोलियो में करोड़ों की उछाल देखी गई।
  • कुछ मामलों में इनसाइडर जानकारी का दुरुपयोग कर मुनाफा बटोरने की शिकायतें मिलीं।

सरकार को शक है कि बेहिसाब मुनाफा, मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी निवेश का जाल अब सेवा क्षेत्र में अंदर तक घुस चुका है।

संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत आदेश – अब नियम ही कानून है : राज्यपाल के नाम से जारी यह आदेश अब राज्य भर के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए बाध्यकारी होगा।

संविधान के अनुच्छेद 348(3) के अंतर्गत इसका अंग्रेजी अनुवाद भी राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है।

अब क्या होगा अगर नियम टूटे?

  • सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा
  • जांच, निलंबन और पद से हटाए जाने की कार्यवाही संभव
  • आर्थिक अपराध शाखा और आयकर विभाग की कड़ी निगरानी

बाज़ार में खलबली, कर्मचारियों में हड़कंप : सरकारी दफ्तरों में दिनभर हलचल बनी रही।

कुछ कर्मचारी इस आदेश को व्यक्तिगत आज़ादी पर हमला मान रहे हैं, तो कुछ अधिकारी इसे “स्वागतयोग्य सख्ती” बता रहे हैं।

एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा :

“सरकारी सेवा बाजार नहीं है, और कर्मचारी दलाल नहीं! यह फैसला देर से सही, मगर जरूरी है।”

अब कोई ‘ऑफिसर इन्वेस्टर’ नहीं होगा : सरकार ने साफ कर दिया है अब सरकारी सेवा में कोई ‘नवीन पोर्टफोलियो मैनेजर’, ‘ऑप्शन गुरु’, या ‘क्रिप्टो स्टार’ बनने का सपना देख रहा है, तो उसे दो ही रास्तों में से एक चुनना होगा या तो सरकारी कुर्सी, या बाजार की दीवानगी!

यह सिर्फ एक अधिसूचना नहीं, बल्कि व्यवस्था की शुद्धिकरण प्रक्रिया का शंखनाद है।
अब सरकारी कर्मचारियों की ज़िम्मेदारी सिर्फ दफ्तर तक सीमित रहेगी बाजार का लोभ, क्रिप्टो की चालबाज़ी और डेरिवेटिव की जुआखोरी अब सेवा के साथ नहीं चल सकती।

छत्तीसगढ़ ने नज़ीर पेश की है। क्या अब अन्य राज्य भी आँखें खोलेंगे?

“शासकीय सेवा में अब कोई ‘ट्रेडिंग महारथी’ नहीं, सिर्फ ‘जनसेवक’ चलेगा।”

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