मनरेगा की RTI पर ग्राम पंचायत सचिव का अजीब जवाब! “रिकॉर्ड जनपद में है, हम संकलित नहीं कर सकते” कहकर जिम्मेदारी से पल्ला? RTI कानून की धारा 5(4), 5(5) और 6(3) पर उठे गंभीर सवाल
1 min read

बरमकेला। ग्राम पंचायत पोरेथ से मनरेगा से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी मांगने वाले RTI आवेदक को दिए गए जवाब ने अब पारदर्शिता और जवाबदेही पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
RTI आवेदक द्वारा वित्तीय वर्ष 2025 से आवेदन दिनांक 03 अगस्त 2026 तक ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत स्वीकृत एवं पूर्ण किए गए कार्यों की प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन, कार्यादेश, माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, उपयोगिता प्रमाण पत्र, मस्टर रोल, कार्यस्थल उपस्थिति, मजदूरी भुगतान, FTO, बैंक/डाकघर भुगतान, सामग्री के बिल, क्वाडर, GST बिल, भुगतान आदेश सहित शिकायत, जांच, सामाजिक अंकेक्षण और कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे।

लेकिन ग्राम पंचायत पोरेथ के कथित जन सूचना अधिकारी/सचिव द्वारा जवाब में कहा गया कि ग्राम पंचायत में केवल स्वीकृत आदेश उपलब्ध रहते हैं तथा शेष जानकारी जनपद पंचायत में संधारित होती है और जन सूचना अधिकारी को आवेदित जानकारी संकलित करके देने का कार्य नहीं होता।
यहीं से पूरे मामले में बड़ा सवाल खड़ा होता है।
जब रिकॉर्ड जनपद में है तो RTI आवेदक को रास्ता क्यों नहीं दिखाया गया?
RTI अधिनियम की धारा 6(3) में स्पष्ट व्यवस्था है कि यदि मांगी गई सूचना किसी दूसरे सार्वजनिक प्राधिकरण के पास है तो आवेदन या उसके संबंधित हिस्से को संबंधित प्राधिकरण को स्थानांतरित किया जा सकता है और आवेदक को इसकी सूचना दी जानी चाहिए।
वहीं धारा 5(4) PIO को यह अधिकार देती है कि वह सूचना उपलब्ध कराने के लिए दूसरे अधिकारी की सहायता ले सकता है। सहायता मांगने वाले अधिकारी को भी धारा 5(5) के तहत RTI के उल्लंघन के संबंध में PIO की तरह जिम्मेदार माना जा सकता है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब मनरेगा का रिकॉर्ड जनपद पंचायत में है, तो क्या संबंधित रिकॉर्ड के लिए जनपद के अधिकारी से सहायता मांगी गई?
अगर नहीं मांगी गई तो क्यों?
अगर सूचना वास्तव में जनपद पंचायत के पास है तो क्या आवेदन के संबंधित हिस्से को धारा 6(3) के तहत वहां भेजा गया?
अगर भेजा गया तो आवेदक को उसका स्पष्ट उल्लेख जवाब में क्यों नहीं मिला?
सिर्फ “संकलित नहीं कर सकते” कह देना कितना उचित?
यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। RTI कानून PIO को ऐसी नई सूचना तैयार करने के लिए बाध्य नहीं करता जो रिकॉर्ड में मौजूद ही न हो। लेकिन आवेदक ने यहां दस्तावेजों/अभिलेखों की प्रतियां मांगी हैं—जैसे मस्टर रोल, भुगतान विवरण, स्वीकृति, कार्यादेश, बिल आदि।
इसलिए यदि ये रिकॉर्ड सरकारी अभिलेखों में मौजूद हैं, तो महज यह कह देना कि “PIO को जानकारी संकलित करके देने का कार्य नहीं होता” अपने-आप में पूरे आवेदन का निस्तारण नहीं माना जा सकता। संबंधित रिकॉर्ड किसके पास है और कानून के अनुसार उसे कैसे उपलब्ध कराया जाना है, इसका स्पष्ट जवाब अपेक्षित है।
सचिव का जवाब देना गलत या सही?
यहां भी तस्वीर पूरी तरह काली-सफेद नहीं है।
यदि ग्राम पंचायत सचिव को विधिवत जन सूचना अधिकारी बनाया गया है, तो उनके द्वारा RTI का जवाब देना गलत नहीं है। RTI Act स्वयं PIO की नियुक्ति और उसके दायित्वों की व्यवस्था करता है।
लेकिन PIO होना केवल पत्र पर हस्ताक्षर करने का अधिकार नहीं, बल्कि RTI आवेदन का कानून के अनुसार निस्तारण करने की जिम्मेदारी भी है।
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
मनरेगा का रिकॉर्ड, पंचायत की जिम्मेदारी और RTI की पारदर्शिता—तीनों पर सवाल
मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। MGNREGA Act में ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारियों तथा सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था भी निर्धारित है।
ऐसे में मनरेगा के कार्यों से जुड़े दस्तावेजों की RTI में मांग होने पर आवेदक को “रिकॉर्ड हमारे पास नहीं है” कहकर मामला खत्म कर देना कितना कानूनसम्मत है, यह जांच का विषय बन गया है।
अब प्रथम अपील में उठने चाहिए ये सीधे सवाल
आवेदक प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष पूछ सकता है—
ग्राम पंचायत पोरेथ के PIO की विधिवत नियुक्ति किस आदेश से हुई?
मांगी गई मनरेगा संबंधी कौन-कौन सी सूचना ग्राम पंचायत में उपलब्ध है?
कौन-कौन सी सूचना जनपद पंचायत में उपलब्ध है?
यदि सूचना जनपद पंचायत में है तो धारा 6(3) के तहत आवेदन स्थानांतरित क्यों नहीं किया गया?
यदि जनपद से रिकॉर्ड लेना आवश्यक था तो धारा 5(4) के तहत सहायता क्यों नहीं ली गई?
आवेदक को संबंधित रिकॉर्ड का निरीक्षण/प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
क्या केवल “सूचना संकलित करके देना PIO का काम नहीं है” कहकर आवेदन का पूर्ण निस्तारण किया जा सकता है?
अब निगाह प्रथम अपीलीय प्राधिकारी पर
यह मामला महज एक RTI का जवाब नहीं है। सवाल यह है कि सरकारी रिकॉर्ड जनता से छिपाया जा रहा है या विभागीय व्यवस्था की कमी का भार RTI आवेदक पर डाला जा रहा है?
RTI Act का उद्देश्य ही सार्वजनिक प्राधिकरणों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।
इसलिए अब देखने वाली बात होगी कि प्रथम अपीलीय प्राधिकारी इस जवाब को सही मानते हैं या PIO को निर्देश देकर मनरेगा से संबंधित उपलब्ध अभिलेख आवेदक को उपलब्ध कराते हैं।
![]()

