RTI पढ़ने में भी चूक! “2025 से अब तक” का मतलब भी नहीं समझ पाए जनसूचना अधिकारी?
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बरमकेला। ग्राम पंचायत पोरेथ से मनरेगा संबंधी जानकारी मांगने वाले RTI आवेदक के जवाब में एक ऐसा बिंदु सामने आया है, जिसने जनसूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
आवेदक ने अपने आवेदन में साफ तौर पर “वित्तीय वर्ष 2025 से अब तक (आवेदन दिनांक 03.08.2026 तक)” की अवधि का उल्लेख किया था। इसके बावजूद ग्राम पंचायत पोरेथ के जनसूचना अधिकारी ने जवाब में लिखा कि आवेदन में यह स्पष्ट नहीं है कि 2024-25 या 2025-26 से जानकारी मांगी गई है।
जब आवेदन में तारीख साफ, फिर भ्रम किस बात का?
आवेदन में 03 अगस्त 2026 तक की अवधि स्पष्ट लिखी गई है। ऐसे में “2025 से अब तक” को लेकर 2024-25 या 2025-26 का भ्रम बताना अपने आप में गंभीर सवाल पैदा करता है।
यदि कार्यालय को आवेदन की अवधि को लेकर वास्तविक अस्पष्टता महसूस हुई थी, तो RTI आवेदक से स्पष्टता मांगी जा सकती थी। लेकिन सवाल यह है कि जिस अधिकारी की जिम्मेदारी RTI आवेदन का विधिवत परीक्षण और निस्तारण करना है, उसी के जवाब में आवेदन की स्पष्ट समय-सीमा को लेकर भ्रम कैसे पैदा हो गया?
मनरेगा की जानकारी मांगी, जवाब में जिम्मेदारी दूसरे कार्यालय पर!
मामला यहीं खत्म नहीं होता। आवेदक ने मनरेगा के कार्यों से जुड़े मस्टर रोल, उपस्थिति पंजी, मजदूरी भुगतान, FTO, बिल, GST बिल, कार्यादेश, माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र सहित कई अभिलेख मांगे हैं।
जवाब में कहा गया कि ग्राम पंचायत में केवल स्वीकृत आदेश उपलब्ध रहते हैं और शेष जानकारी जनपद पंचायत में संधारित होती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि सूचना जनपद पंचायत के पास है तो RTI कानून के तहत उचित प्रक्रिया अपनाई गई या नहीं? क्या संबंधित सूचना के लिए दूसरे अधिकारी से सहायता ली गई? और यदि आवेदन का कोई हिस्सा दूसरे सार्वजनिक प्राधिकरण से संबंधित था, तो क्या उसे नियमानुसार स्थानांतरित किया गया?
सचिव ही PIO हैं तो जवाबदेही भी उन्हीं की!
पत्र के अंत में ग्राम पंचायत सचिव ने खुद को “जन सूचना अधिकारी/ग्राम पंचायत सचिव” बताया है। इसलिए अब यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उन्हें किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश से जनसूचना अधिकारी नामित किया गया है और उनकी RTI संबंधी जिम्मेदारी की सीमा क्या है।
RTI आवेदक को सूचना चाहिए, सरकारी दफ्तरों के बीच फुटबॉल बनना नहीं।
यदि रिकॉर्ड ग्राम पंचायत में नहीं है तो संबंधित रिकॉर्ड किस कार्यालय में है, इसका स्पष्ट उल्लेख और कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई होना चाहिए। केवल यह लिख देना कि “जानकारी संकलित करके देने का कार्य नहीं होता” पूरे आवेदन के निस्तारण का विकल्प नहीं बन सकता।
अब जिम्मेदार अधिकारियों से सीधे सवाल
“2025 से अब तक” को 2024-25 या 2025-26 में अस्पष्ट कैसे माना गया?
क्या PIO ने आवेदन को पूरा पढ़कर बिंदुवार परीक्षण किया?
जनपद पंचायत में रिकॉर्ड है तो संबंधित सूचना प्राप्त करने की कार्रवाई क्यों नहीं?
क्या RTI आवेदन के संबंधित हिस्से को नियमानुसार स्थानांतरित किया गया?
PIO की सहायता के लिए संबंधित अधिकारी से सूचना क्यों नहीं मांगी गई?
आवेदक को रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के बजाय उसे दूसरे कार्यालय की ओर क्यों भेजा जा रहा है?
आखिर मनरेगा के रिकॉर्ड की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और RTI की जवाबदेही किसकी?
अब निगाह प्रथम अपीलीय प्राधिकारी और जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों पर है। इस पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि RTI आवेदन का निस्तारण नियमों के अनुरूप हुआ है या फिर सरकारी रिकॉर्ड देने से बचने के लिए तकनीकी आपत्तियों का सहारा लिया गया है।
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