आरटीआई में बड़ा खुलासा: “समिति हमारे विकासखंड में पंजीकृत ही नहीं”, फिर धान खरीदी और रिकॉर्ड किसके पास? डोंगरीपाली सेवा सहकारी समिति से जुड़े धान खरीदी के रिकॉर्ड की मांग पर सहायक आयुक्त सहकारिता का जवाब, आवेदक को जानकारी देने से किया इनकार
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सारंगढ़-बिलाईगढ़। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारी को लेकर सहकारिता विभाग के जवाब ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम गोबरसिंहा निवासी अजय कुमार साहू द्वारा डोंगरीपाली सेवा सहकारी समिति से वर्ष 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में हुई धान खरीदी से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इसमें किसानों की नामावली, खरीदी गई धान की मात्रा, किसानों को किए गए भुगतान, बारदाना, परिवहन एवं अन्य खर्चों का विवरण सहित समिति के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, प्रबंधक एवं कर्मचारियों की नियुक्ति, बैंक खाते और ऑडिट रिपोर्ट तक की जानकारी शामिल थी।

लेकिन सहायक आयुक्त सहकारिता एवं सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाएं, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि डोंगरीपाली सेवा सहकारी समिति वर्तमान में विकासखंड बरमकेला में पंजीकृत समिति नहीं है। इसी आधार पर पत्र में कहा गया है कि उक्त समिति की जानकारी आवेदक को दिया जाना संभव नहीं है।
जवाब के बाद सबसे बड़ा सवाल—अगर समिति पंजीकृत नहीं है तो धान खरीदी कैसे हुई?
विभागीय जवाब सामने आने के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि डोंगरीपाली सेवा सहकारी समिति संबंधित विकासखंड में पंजीकृत नहीं है, तो उसके नाम से मांगे गए धान खरीदी, किसानों की सूची, भुगतान, बारदाना, परिवहन और ऑडिट जैसे रिकॉर्ड आखिर किस संस्था या विभाग के पास हैं?
क्या समिति का पंजीयन किसी अन्य क्षेत्र में है?
क्या समिति का नाम या पंजीयन विवरण बदल गया है?
क्या धान खरीदी किसी अन्य संस्था के माध्यम से हुई थी?
यदि ऐसा है तो किसानों से संबंधित रिकॉर्ड किसके पास सुरक्षित हैं?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब विभागीय पत्र में दिखाई नहीं देता।
आरटीआई आवेदक ने मांगे थे कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड
आवेदक ने वर्ष 2022 से वर्तमान तक समिति के खाद, बीज एवं कृषि सामग्री के स्टॉक तथा वितरण रजिस्टर की प्रमाणित प्रतियां, समिति में पदस्थ प्रबंधक, ऑपरेटर एवं कर्मचारियों के नाम-पद और नियुक्ति आदेश, समिति के बैंक खाते एवं कैश बुक सहित वर्ष 2022 से वर्तमान तक की ऑडिट रिपोर्ट जैसी जानकारी भी मांगी थी।
ऐसे में विभाग द्वारा केवल समिति के पंजीकृत नहीं होने का हवाला देकर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब अपील में मांगा जा सकता है रिकॉर्ड का सही पता
मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी तक भी पहुंच चुका है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करें कि डोंगरीपाली सेवा सहकारी समिति का वास्तविक पंजीयन कहां है, धान खरीदी किस संस्था/समिति के माध्यम से हुई और संबंधित रिकॉर्ड किस कार्यालय में उपलब्ध हैं।
मामला सिर्फ आरटीआई में जानकारी नहीं मिलने का नहीं है, बल्कि उस जानकारी के पीछे छिपे रिकॉर्ड और जिम्मेदारी का है। यदि समिति वास्तव में पंजीकृत नहीं थी, तो उसके नाम से संचालित गतिविधियों की जांच और दस्तावेजों की जिम्मेदारी तय होना भी जरूरी है।
बड़ा सवाल: रिकॉर्ड नहीं है या रिकॉर्ड देने से बचा जा रहा है?
अब देखना होगा कि प्रथम अपीलीय अधिकारी इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं। आरटीआई का उद्देश्य जानकारी रोकना नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। इसलिए आवेदक को “जानकारी संभव नहीं” कहने के बजाय संबंधित रिकॉर्ड किस विभाग, संस्था अथवा कार्यालय में उपलब्ध हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी देना भी जवाबदेही का हिस्सा है।
सच का खुलासा न्यूज की नजर अब इस बात पर है कि डोंगरीपाली सेवा सहकारी समिति का वास्तविक पंजीयन कहां है और वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक हुई धान खरीदी का पूरा रिकॉर्ड आखिर किसके पास है?
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