छुरा में शिक्षा की नई उड़ान: 128 महिलाओं ने दी 10वीं की ओपन परीक्षा
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जिला ब्यूरो चीफ -ओंकार शर्मा
मातृत्व और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी नहीं छोड़ा पढ़ाई का सपना, बच्चों और नवजात शिशुओं को साथ लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचीं कई महिलाएं
छुरा। शिक्षा हासिल करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियां और परिस्थितियां भी सपनों की राह नहीं रोक सकतीं। छुरा विकासखंड में इसका प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला, जहां वर्षों पहले पढ़ाई छोड़ चुकी किशोरियों और महिलाओं ने दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ते हुए 10वीं की ओपन स्कूल परीक्षा में हिस्सा लिया। विकासखंड के 13 गांवों की 128 महिला परीक्षार्थियों ने परीक्षा में शामिल होकर शिक्षा के प्रति अपने संकल्प का परिचय दिया।
गांव-गांव संपर्क कर शिक्षा से जोड़ा
Agrocret’s Society for Rural Development एवं Educate Girls के संयुक्त प्रयास से 14 से 29 वर्ष की किशोरियों एवं महिलाओं को दोबारा शिक्षा से जोड़ने की पहल की गई। अभियान के तहत गांव-गांव संपर्क कर स्कूल से बाहर हो चुकी बालिकाओं और महिलाओं की पहचान की गई। इसके बाद परिवारों से संवाद, काउंसलिंग, लर्निंग क्लास, शैक्षणिक मार्गदर्शन, मेंटरशिप और नियमित फॉलोअप के माध्यम से परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार किया गया।
बच्चों और नवजात को साथ लेकर पहुंचीं परीक्षा केंद्र
परीक्षा के दौरान कई महिलाओं की तस्वीरें प्रेरणा का केंद्र बनीं। कुछ महिलाएं अपने छोटे बच्चों को, तो कुछ अपने नवजात शिशुओं को साथ लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचीं। एक ओर मातृत्व और परिवार की जिम्मेदारियां थीं, तो दूसरी ओर वर्षों से अधूरे पड़े शिक्षा के सपने को पूरा करने का संकल्प।
महिलाओं की यह पहल संदेश देती है कि पारिवारिक जिम्मेदारियां शिक्षा की राह में बाधा जरूर हो सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और सहयोग के साथ इन्हें पार करते हुए आगे बढ़ा जा सकता है।
परिवारों की काउंसलिंग से बढ़ा आत्मविश्वास
कार्यक्रम के तहत ग्राम स्तर पर लगातार संपर्क कर उन महिलाओं और किशोरियों की पहचान की गई, जिनकी पढ़ाई विभिन्न कारणों से बीच में छूट गई थी। परिवारों की काउंसलिंग कर उन्हें दोबारा पढ़ाई शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। लर्निंग गतिविधियों, शैक्षणिक मार्गदर्शन और नियमित फॉलोअप के माध्यम से परीक्षार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास किया गया।
टीम और ग्राम स्तरीय प्रेरकों की अहम भूमिका
अभियान को सफल बनाने में Programme Coordinator हेमांजली कन्नौजे, Data Officer आस्था वर्मा एवं ग्राम स्तरीय प्रेरकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हेमांजली कन्नौजे ने फील्ड गतिविधियों के समन्वय, टीम मार्गदर्शन और परीक्षार्थियों को निरंतर प्रोत्साहित करने का कार्य किया। वहीं आस्था वर्मा ने कार्यक्रम की प्रगति की निगरानी में सहयोग दिया।
ग्राम स्तरीय प्रेरकों ने समुदाय से लगातार संपर्क रखते हुए परीक्षार्थियों की पहचान, परिवारों की काउंसलिंग, लर्निंग गतिविधियों और फॉलोअप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
10वीं के बाद खुलेंगे आगे बढ़ने के रास्ते
महिलाओं का दोबारा शिक्षा की ओर लौटना केवल परीक्षा में शामिल होने तक सीमित नहीं है। 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके लिए आगे की शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसरों के रास्ते खुल सकते हैं। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा के लिए उम्र नहीं, इच्छाशक्ति जरूरी
ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र की इन महिलाओं ने अपने प्रयास से साबित किया है कि शिक्षा के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। सही अवसर, मार्गदर्शन और परिवार एवं समाज का सहयोग मिले तो अधूरी पढ़ाई को दोबारा शुरू कर सपनों को नई दिशा दी जा सकती है।
छुरा क्षेत्र में महिला शिक्षा और पुनःशिक्षा की दिशा में Agrocret’s Society for Rural Development एवं Educate Girls की यह पहल उन महिलाओं और किशोरियों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है, जिन्होंने किसी कारण से अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी।
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