October 14, 2026

15 अगस्त को भी विद्यालय भवन की मांग को लेकर धरने पर ग्रामीण, 5 दिन से जारी आंदोलन

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जिला ब्यूरो चीफ  -ओंकार शर्मा

गरियाबंद। देशभर में शनिवार को 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में तिरंगा फहराया जा रहा है, वहीं गरियाबंद जिले के रुवाड क्षेत्र में ग्रामीण इसी दिन विद्यालय भवन की मांग को लेकर धरने पर बैठे नजर आए। पिछले करीब चार से पांच दिनों से जारी इस आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

8 से 10 वर्षों से विद्यालय भवन की मांग

ग्रामीणों के मुताबिक, क्षेत्र में विद्यालय भवन की मांग पिछले 8 से 10 वर्षों से की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से आवेदन और अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखने के बावजूद अब तक विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसी के चलते ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

अधिकारियों ने की थी ग्रामीणों से बातचीत

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक विद्यालय भवन को लेकर लिखित आश्वासन अथवा स्पष्ट समाधान नहीं मिलता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

स्वतंत्रता दिवस पर धरना, उठे सवाल

धरने की शुरुआत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के मौके पर पहुंचने की भी जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार एसडीएम, तहसीलदार सहित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उनसे बातचीत की थी, लेकिन बातचीत के बाद भी ऐसा कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया, जिससे ग्रामीण अपना आंदोलन समाप्त कर दें।

15 अगस्त के दिन जब देश आजादी का जश्न मना रहा है, उसी समय ग्रामीणों का विद्यालय भवन के लिए धरने पर बैठना चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शिक्षा का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए भी वर्षों तक आंदोलन करना पड़े, तो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या है?

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता

ग्रामीणों की चिंता सिर्फ विद्यालय भवन तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि भवन की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पालकों के सामने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर भी कठिन परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है।

इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान निकाले।

22,466 करोड़ के शिक्षा बजट के बीच रुवार का सवाल

छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए ₹22,466 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।

ऐसे में रुवाड के ग्रामीणों का सवाल है कि राज्य के इतने बड़े शिक्षा बजट में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय भवनों की मूलभूत जरूरतों को किस तरह प्राथमिकता दी जा रही है। बजट दस्तावेजों में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए अलग से Outcome Budget भी उपलब्ध कराया गया है।

हालांकि, रूवाड़ के संबंधित विद्यालय भवन के लिए स्वीकृति, बजट और निर्माण की समयसीमा को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

अब आश्वासन नहीं, कार्रवाई की मांग

धरने पर बैठे ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन केवल बातचीत तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यालय भवन निर्माण को लेकर स्पष्ट निर्णय ले। ग्रामीण चाहते हैं कि भवन की स्वीकृति, बजट और निर्माण शुरू होने की संभावित समयसीमा सार्वजनिक की जाए।

स्वतंत्रता दिवस के दिन रूवाड़ से उठ रही यह आवाज अब प्रशासन के लिए एक अहम सवाल बन गई है—क्या वर्षों से विद्यालय भवन की मांग कर रहे ग्रामीणों को अब भी सिर्फ आश्वासन मिलेगा, या बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस फैसला लिया जाएगा?

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