सरपंच द्वारा अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई स्थगित करने की शिकायत पर सवाल : पारदर्शिता की मांग
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सारंगढ़ बिलाईगढ़ /ग्राम पंचायत गोबरसिंहा (जनपद पंचायत बरमकेला, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़) से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें पंचायत के सरपंच द्वारा कलेक्टर को आवेदन प्रस्तुत कर अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई को स्थगित करने की मांग की गई है। यह प्रकरण न केवल ग्रामीण प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका किस प्रकार विवादित हो सकती है।
शिकायत का सार
उक्त आवेदन में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र की सार्वजनिक भूमि पर पिछले कई वर्षों से कुछ व्यक्तियों द्वारा कब्जा कर मकान एवं अन्य निर्माण कर लिए गए हैं। तहसीलदार न्यायालय ने इस अवैध कब्जे को हटाने का आदेश पारित किया था। किंतु सरपंच द्वारा कलेक्टर को यह कहते हुए पत्र लिखा गया कि उक्त कार्रवाई स्थगित की जाए, क्योंकि इससे गांव में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और शांति भंग होने की आशंका है।
सरपंच का यह भी तर्क है कि –
- कब्जाधारियों का मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित रहा है।
- पंचायत अधिनियम 2006 की धारा के तहत उक्त पक्षकार को अपील का अधिकार है, इसलिए तत्काल कार्रवाई उचित नहीं।
- कब्जा हटाने की कार्रवाई से गांव में विवाद और अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
- पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 56 के अनुसार सार्वजनिक मार्ग एवं भूमि पर कब्जा हटाने का अधिकार तहसीलदार को है, लेकिन पंचायत का यह भी कर्तव्य है कि विवाद की स्थिति में निष्पक्ष मार्गदर्शन दे।
उचितता पर प्रश्न
यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरपंच का यह कदम न्यायसंगत और उचित है? पंचायत का मूल कर्तव्य है कि वह गांव की शासकीय भूमि की रक्षा करे और अवैध कब्जे को रोकने में प्रशासन का सहयोग करे। जब तहसीलदार न्यायालय द्वारा कब्जा हटाने का आदेश पारित हो चुका है, तब पंचायत प्रमुख का यह कहना कि कार्रवाई रोक दी जाए, सीधे-सीधे आदेश की अवहेलना जैसा प्रतीत होता है।
यदि वास्तव में कब्जाधारी वर्षों से भूमि पर अवैध निर्माण कर बैठे हैं, तो यह ग्राम समाज के हित में नहीं है। सरपंच का यह कहना कि कार्रवाई से गांव में अशांति फैल सकती है, एक प्रकार से कब्जाधारियों को संरक्षण देने का प्रयास भी माना जा सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांति बनाए रखना प्रशासन का दायित्व है, लेकिन कानूनन कब्जा हटाना न्यायालय का आदेश है, जिसे टालना या स्थगित करना उचित नहीं।
पारदर्शिता की मांग
यहां पारदर्शिता इसलिए आवश्यक है क्योंकि –
यदि सरपंच स्वयं या उनके निकटजन भूमि विवाद में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हैं, तो यह स्पष्ट हितों का टकराव (Conflict of Interest) है।
पंचायत प्रतिनिधि के रूप में सरपंच का दायित्व पूरे गांव की सामूहिक संपत्ति की रक्षा करना है, न कि किसी कब्जाधारी के पक्ष में खड़ा होना।
प्रशासनिक आदेश को स्थगित करने की मांग करने से ग्रामीणों के बीच गलत संदेश जाता है और पंचायत की विश्वसनीयता पर आंच आती है।
निष्कर्ष
इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट होता है कि सरपंच की शिकायत न्यायालयीन आदेश के विपरीत है और इससे कब्जाधारियों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलता है। जबकि ग्राम पंचायत अधिनियम और पंचायत प्रतिनिधियों की शपथ यही कहती है कि वे सार्वजनिक भूमि की रक्षा करेंगे और अवैध कब्जा हटाने में सहयोग देंगे,लेकिन इस मामले में वर्तमान सरपंच पद पर काबिज होने के बावजूद भी बिना ग्राम पंचायत के सहमति सहित ग्राम पंचायत प्रस्ताव या ग्राम सभा प्रस्ताव के माननीय कार्यपालिक दंडाधिकारी सरिया के आदेश के विरुद्ध वर्षों से बलपूर्वक धनबल के कारण अवैध भूमियों को अतिक्रमण कर आलीशान घर, गोदाम, व व्यापारिक दुग्ध संग्रहण केंद्र सहित अतिरिक्त शासकीय भूमि पर कब्जा किया गया है लोगों के समर्थन में अपनी पद की दुरुपयोग कर आपराधिक काम करने वालों को बढ़ावा देने का काम किया गया है जो विधी के खिलाफ है…?
इसलिए इस विषय में पारदर्शी जांच आवश्यक है कि सरपंच द्वारा यह पत्र किन परिस्थितियों में लिखा गया और इसमें उनका क्या व्यक्तिगत या राजनीतिक हित निहित है। यदि यह साबित होता है कि शिकायत मात्र कब्जाधारियों को बचाने के उद्देश्य से की गई है, तो यह सरपंच की जिम्मेदारी और जनप्रतिनिधि धर्म के खिलाफ है,साथ ही सरपंच साहब जी के व्यक्तिगत स्वार्थ और स्वयं के द्वारा तत्कालीन समय में जनपद पंचायत सदस्य के रूप में काबिज होने के बावजूद शासकीय भूमि को अवैध रूप से गोदाम का निर्माण किया गया है जो वर्तमान समय में आधा अधूरा है और उसको वर्तमान समय में ग्राम पंचायत गोबरसिंहा के सरपंच पद पर काबिज होने के कारण पूर्ण करने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं इसलिए यह बात स्पष्ट हो चुका है कि ग्राम पंचायत गोबरसिंहा रसूखदार बेजाकब्जाधारी को बचाने में पूर्व एवं वर्तमान सरपंच एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं….???
जनहित की दृष्टि से प्रशासन को चाहिए कि वह न्यायालय के आदेशों का पालन कर अवैध कब्जा मुक्त कराए और साथ ही गांव में शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक पुलिस बल की व्यवस्था करे। तभी लोकतंत्र और न्याय की सच्ची रक्षा संभव है।
👉 निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि सरपंच की शिकायत न्यायसंगत और उचित नहीं मानी जा सकती। यह न केवल आदेश की अवमानना है बल्कि ग्राम समाज की सामूहिक भूमि पर कब्जाधारियों को बढ़ावा देने वाला कदम है।
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