September 26, 2026

NHM कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का 17वाँ दिन – “आश्वासनों का गुब्बारा, मांगों का हल कहाँ?” “सिर मुंडाकर शासन को चेताया”

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रायगढ़, 03 सितंबर 2025:छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के कर्मचारी, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, पिछले 17 दिनों से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। सरकार और प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही, और कर्मचारियों भी अपनी मांगों पर अड़े है।

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“24 घंटे अल्टीमेटम के काले आदेश का विरोध मुंडन होकर किया”
शासन-प्रशासन की ओर से दिया गया 24 घंटे का अल्टीमेटम, जिसमें कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी गई, NHM कर्मचारियों के लिए किसी “काले आदेश” से कम नहीं था। इसके जवाब में कर्मचारियों ने सिर मुंडवाकर अपना रोष जताया। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि 20 साल से चले आ रहे शोषण के खिलाफ बगावत का प्रतीक है।

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“कल कर्मचारी स्वास्थ्य भवन का कर चुके हैं घेराव, प्रशासन से वार्ता विफल”
कल स्वास्थ्य भवन के बाहर कर्मचारियों ने घेराव कर अपनी आवाज बुलंद की, लेकिन प्रशासन ने वार्ता में सिर्फ टालमटोल का राग अलापा। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे। स्वास्थ्य भवन के बाहर नारेबाजी और मानव श्रृंखला ने साफ कर दिया कि अब आंदोलन और तेज होगा।

“प्रशासनिक अधिकारी सहमति लिखकर देने को तैयार नहीं”
प्रशासन बार-बार मौखिक आश्वासनों का ढोल पीट रहा है, लेकिन लिखित सहमति देने से कतरा रहा है। कर्मचारी पूछ रहे हैं, “क्या सरकार की गारंटी सिर्फ भाषणों तक सीमित है?” बिना लिखित आदेश के कर्मचारियों का भरोसा टूट चुका है।
“05 मांगे तथा ग्रेड-पे पर कोई लिखित आदेश नहीं”
शासन दावा करता है कि पांच मांगें मान ली गई हैं, लेकिन कर्मचारियों के हाथ में कोई लिखित आदेश नहीं है। ग्रेड-पे का मुद्दा भी हवा में लटका हुआ है।

कर्मचारी कहते हैं, “कागजों पर मुहर लगाने में इतना डर क्यों? क्या मांगें मानना सरकार के लिए इतना मुश्किल है?”

“आश्वासन नहीं, आदेश चाहिए”
NHM कर्मचारी अब खोखले वादों से तंग आ चुके हैं। वे साफ कह रहे हैं कि मौखिक आश्वासनों का समय खत्म, अब सिर्फ लिखित आदेश ही हड़ताल खत्म कर सकता है।

“मोदी की गारंटी का क्या हुआ?” – कर्मचारियों का यह सवाल सरकार के लिए चुनौती बन चुका है।

“हड़ताल जारी रहेगी, जरूरत पड़ने पर आंदोलन और उग्र किया जाएगा”
17वें दिन भी कर्मचारियों का जोश ठंडा नहीं पड़ा है। वे चेतावनी दे रहे हैं कि अगर मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और उग्र होगा। प्रदर्शन, नृत्य-नाटक, और अनोखे विरोध के जरिए कर्मचारी अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
“जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी”

कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहे असर की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। “हम स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार हमें मजबूर कर रही है। अगर व्यवस्था चरमराती है, तो इसका ठीकरा सरकार के सिर होगा,” कर्मचारियों ने कहा।
“10 मांगे”
कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों में नियमितीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड-पे निर्धारण, 27% वेतन वृद्धि, कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता, नियमित भर्ती में आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति, और मेडिकल व अन्य अवकाश की सुविधा शामिल हैं। ये मांगें पिछले 20 सालों से लंबित हैं, लेकिन सरकार का रवैया “न सुनो, न देखो, न बोलो” वाला बना हुआ है।

संघ की अपील:
NHM कर्मचारी पूछ रहे हैं, “जब हम रात-दिन स्वास्थ्य सेवाओं को संभालते हैं, तो हमारी मांगों को संभालने में सरकार को इतनी परेशानी क्यों?” प्रदेश की 6,239 स्वास्थ्य संस्थाएं प्रभावित हो रही हैं, लेकिन सरकार की चुप्पी बरकरार है। कर्मचारी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या “स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़” को मजबूत करने का वादा भी सिर्फ जुमला था?

कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार जल्द उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं करती, तो आंदोलन और तेज होगा। नारायणपुर से रायपुर तक, कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाई है और साफ कर दिया है कि वे तब तक नहीं झुकेंगे, जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।

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