February 11, 2026

अवैध महुआ शराब बंद, अब मदिरा दुकानों से खरीदकर दबंगई से महंगे दामों पर हो रही बिक्री

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बरमकेला गोबरसिंहा /अवैध महुआ शराब पर शासन द्वारा कड़ी कार्रवाई के बाद अब एक नई समस्या ने जन्म ले लिया है। पहले जहां गांवों और कस्बों में अवैध रूप से महुआ से बनी देसी शराब की बिक्री धड़ल्ले से होती थी, वहीं अब कुछ दबंग किस्म के लोग सरकारी मदिरा दुकानों से शराब खरीदकर उसे अपने घरों में स्टॉक कर रहे हैं और ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, मदिरा दुकानों से खरीदी गई शराब का एक पाव (जिसकी कीमत सरकारी दर पर लगभग 80 रुपये है) को अब 120 रुपये में खुलेआम बेचा जा रहा है। न केवल दाम बढ़ा दिए गए हैं, बल्कि इस अवैध बिक्री के दौरान दबंगई का भी जमकर प्रदर्शन किया जा रहा है। ग्रामीणों और प्रशासन द्वारा कई बार मना किए जाने और समझाइश के बावजूद भी इन तत्वों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले तो गांवों में महुआ शराब के अड्डे चलते थे, जहां लोग कम दाम में नशा प्राप्त कर लेते थे। लेकिन जब शासन ने इन अड्डों पर शिकंजा कसा और अवैध निर्माण व बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित किया, तो लोगों ने शराब के अन्य रास्ते तलाशने शुरू कर दिए। अब मदिरा दुकानों से थोक में शराब खरीदी जा रही है और उसे अधिक मुनाफे के लालच में गांव-गांव बेचने का नया अवैध धंधा शुरू हो गया है।

अक्सर देखा जा रहा है कि ये दबंग तत्व, जिनके पास पहले से सामाजिक या राजनीतिक पकड़ है, प्रशासन की चेतावनियों को भी नजरअंदाज कर रहे हैं। कई बार ग्रामीणों ने इस अवैध बिक्री के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार दबंगई और प्रभाव के चलते मामले दबा दिए जाते हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर खासा आक्रोश है कि जब अवैध शराब पर कार्रवाई की गई है, तो इस नए प्रकार के गोरखधंधे पर भी कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे इस समस्या से भलीभांति परिचित हैं और जल्द ही इन गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध बिक्री की सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारी को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।

ग्रामीणों ने भी मांग की है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए उनके अवैध कारोबार पर रोक लगाई जाए, ताकि गांवों में शांति और सुव्यवस्था बनी रह सके। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती है और युवाओं को नशे की गर्त में धकेल सकती है।

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