RTI में बड़ा सवाल! 5 बिंदुओं की जानकारी मांगी, जवाब में सिर्फ 2 पन्नों का हवाला—बिना अवलोकन पूरी सूचना देने से विभाग का इनकार? जल संसाधन विभाग बरमकेला में सूचना के अधिकार को लेकर उठे सवाल, आवेदक को अब तक नहीं मिली मांगी गई विस्तृत जानकारी
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बरमकेला। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए बनाए गए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर जल संसाधन विभाग बरमकेला की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्राम गोबरसिंहा निवासी अजय कुमार साहू ने दिनांक 10 अगस्त 2026 को जनसूचना अधिकारी, जल संसाधन विभाग/सिंचाई विभाग बरमकेला को RTI आवेदन प्रस्तुत कर वित्तीय वर्ष 2023-24 से आवेदन दिनांक तक बरमकेला क्षेत्र में विभाग द्वारा कराए गए निर्माण, मरम्मत एवं विकास कार्यों से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी थी।
आवेदन में केवल सामान्य जानकारी नहीं, बल्कि कार्यवार सूची, स्वीकृत राशि, तकनीकी स्वीकृति, प्राक्कलन, निविदा, कार्यादेश, ठेकेदार/फर्म का विवरण, भुगतान, बिल-वाउचर, GST बिल, माप पुस्तिका (MB), गुणवत्ता जांच रिपोर्ट, विभागीय निरीक्षण रिपोर्ट तथा मौके पर किए गए वास्तविक कार्य और भौतिक सत्यापन से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज मांगे गए थे।
जवाब आया, लेकिन सवालों का जवाब कितना मिला?
विभाग की ओर से दिनांक 04 सितंबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि आवेदक द्वारा मांगी गई प्रथम जानकारी 2 पेज की है और उसकी प्रति के लिए ₹4 जमा करने को कहा गया है।
यहीं से सूचना के अधिकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा होता है। आवेदक ने पांच अलग-अलग बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी और प्रमाणित दस्तावेज मांगे थे, लेकिन विभागीय पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पांचों बिंदुओं में से किस बिंदु की कौन-कौन सी सूचना उपलब्ध कराई जा रही है और किन दस्तावेजों की जानकारी शेष है।
समय-सीमा में ‘पूर्ण सूचना’ या सिर्फ शुल्क की सूचना?
RTI आवेदन दिनांक 10/08/2026 का है और विभाग का जवाब 04/09/2026 को जारी हुआ। यानी विभाग ने समय-सीमा के भीतर पत्र तो जारी किया, लेकिन विवाद इस बात को लेकर है कि क्या आवेदक के मांगे गए पांचों बिंदुओं की पूर्ण एवं बिंदुवार सूचना वास्तव में उपलब्ध कराई गई?
सिर्फ यह बता देना कि “प्रथम जानकारी 2 पेज की है” और ₹4 जमा करने को कहना, तब सवालों के घेरे में आता है जब आवेदन में MB, भुगतान बिल, GST बिल, स्वीकृति, गुणवत्ता जांच और वास्तविक कार्य जैसे कई अलग-अलग अभिलेख मांगे गए हों।
अभिलेखों का अवलोकन भी नहीं कराया, फिर सूचना कैसे पूरी?
आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी में बड़े पैमाने पर विभागीय अभिलेख शामिल हैं। ऐसे में यदि रिकॉर्ड अधिक मात्रा में है तो आवेदक को संबंधित अभिलेखों के अवलोकन का अवसर देकर आवश्यक पृष्ठों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
लेकिन उपलब्ध जवाब में अभिलेखों के अवलोकन की कोई स्पष्ट व्यवस्था/तिथि नहीं बताई गई, बल्कि केवल दो पृष्ठ की प्रथम जानकारी और ₹4 शुल्क का उल्लेख किया गया है।
अब सवाल यह है कि क्या दो पन्नों में विभाग द्वारा कराए गए सभी निर्माण एवं विकास कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान, MB, गुणवत्ता जांच और मौके पर वास्तविक कार्य तक की पूरी जानकारी समा गई?
अब देखना होगा आगे क्या होता है
मामला अभी प्रथम अपील तक नहीं पहुंचा है। आवेदक के पास विभागीय जवाब का अध्ययन करने के बाद आगे RTI अधिनियम के तहत प्रथम अपील का रास्ता खुला है।
यदि आवेदक प्रथम अपील करता है तो मुख्य मांग यही होगी कि मूल आवेदन के पांचों बिंदुओं का बिंदुवार जवाब, उपलब्ध सभी संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां तथा आवश्यकता होने पर रिकॉर्ड के अवलोकन का अवसर दिया जाए।
अब असली परीक्षा यह है कि सूचना का अधिकार केवल ₹4 के दो पन्नों तक सीमित रहता है या सरकारी कार्यों से जुड़े उन दस्तावेजों तक पहुंचेगा, जिनसे स्वीकृति, खर्च, भुगतान, माप और वास्तविक निर्माण की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
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