October 27, 2026

दस दिन बाद भी जिम्मेदारियों की सूची नहीं, जनपद कार्यालय में मनमानी के आरोप प्रभारी CEO शिक्षा शर्मा की कार्यशैली पर उठे सवाल, जानकारी मांगने वाले पत्रकार को भी लगवाए जा रहे चक्कर

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बरमकेला । जनपद पंचायत कार्यालय बरमकेला में व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को कौन-कौन सा विभाग और किस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इसकी नामवार सूची उपलब्ध कराने के लिए लिखित आवेदन दिए जाने के बावजूद दस दिन बीत गए, लेकिन अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।मामला महज एक सूची का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। जब किसी कार्यालय में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारियों की जानकारी मांगी जाती है, तो आखिर उसे उपलब्ध कराने में इतनी देरी क्यों? क्या सूची तैयार नहीं है, या फिर जिम्मेदारियां सार्वजनिक करने से किसी तरह की असहज स्थिति पैदा हो सकती है? यही सवाल अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।आवेदन के बाद भी टालमटोल क्यों?जनपद पंचायत कार्यालय में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारियों और विभागवार कार्य विभाजन की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग को लेकर लिखित आवेदन दिया गया था। उद्देश्य साफ था—जनता को यह पता चल सके कि किस कार्य के लिए किस अधिकारी-कर्मचारी से संपर्क किया जाए।लेकिन दस दिन गुजरने के बाद भी सूची नहीं मिलना प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। यदि कार्यालय में कार्य विभाजन स्पष्ट है तो उसकी सूची देने में आखिर परेशानी क्या है? और यदि सूची तैयार ही नहीं है, तो फिर कार्यालय में काम किस व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा है?

डिप्टी कलेक्टर पद का रौब या प्रशासनिक जवाबदेही

प्रभारी CEO शिक्षा शर्मा के कार्यकाल में कार्यालय की कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पद और प्रशासनिक अधिकारों का प्रभाव आम जनता तथा जानकारी जुटाने वाले पत्रकारों पर दिखाया जा रहा है।सरकारी पद किसी व्यक्ति को जनता से जवाबदेही से बचने का अधिकार नहीं देता। अधिकारी का पद जितना बड़ा होता है, जवाबदेही भी उतनी ही बड़ी होती है।एक पत्रकार यदि सरकारी कार्यालय में जनहित से जुड़ी खबर के लिए जानकारी लेने पहुंचता है और उसे जानकारी देने के बजाय बार-बार चक्कर लगवाए जाते हैं, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है। सूची देने में आखिर अड़चन कहां है?सबसे बड़ा सवाल यही है कि दस दिन बाद भी कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारियों की सूची क्यों नहीं दी गई?क्या कार्यालय में जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं है?क्या विभागवार कार्य विभाजन की जानकारी सार्वजनिक करने में कोई दिक्कत है?या फिर जानबूझकर जानकारी रोककर रखी जा रही है?इन सवालों का जवाब जनपद पंचायत कार्यालय और प्रभारी CEO से अपेक्षित है।जनता को जानकारी मांगने के लिए चक्कर नहीं, व्यवस्था को जवाब देने की आदत होनी चाहिए। सरकारी कार्यालय किसी अधिकारी की निजी जागीर नहीं, बल्कि जनता के पैसे से संचालित सार्वजनिक संस्था है। ऐसे में पारदर्शिता से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए भी यदि दस दिन तक इंतजार करना पड़े, तो निश्चित तौर पर व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।अब देखना यह होगा कि प्रभारी CEO शिक्षा शर्मा इस मामले में क्या जवाब देती हैं और जिम्मेदारियों की नामवार सूची कब तक उपलब्ध कराई जाती है।

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