“50 हजार दो, नहीं तो खबर चलाकर कर देंगे बदनाम”
1 min read
सारंगढ़/डोंगरीपाली: छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली और ब्लैकमेलिंग का एक शर्मनाक मामला उजागर हुआ है। ग्राम पंचायत करपी में सरकारी काम रुकवाने और बदनाम करने की धमकी देकर दो तथाकथित पत्रकारों द्वारा सरपंच प्रतिनिधि को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। पीड़ित ने अब डोंगरीपाली थाने में नामजद शिकायत दर्ज कराकर सुरक्षा और कार्रवाई की गुहार लगाई है।

मामला यहां समझने योग्य है:
निर्माण कार्य के स्थल में दोनो तथाकथित व्यक्ति 6 फरवरी को जब ग्राम पंचायत करपी पहुंचा था तो उसी दिन अपने यूट्यूब पर समाचार क्यों नहीं छापा? क्या रुपए के बाकी 30 हजार का इंतजार कर रहे थे? अगर समाचार छापना था तो उसी दिन क्यों नहीं छापे? क्यों 5,6 दिन बाद छापना पढ़ा? बीते 11,12 फरवरी को क्यों अपने यूट्यूब पर प्रकाशित किया? मामला को आप समझ सकते हो कि कितना वसूली बाज है। वही वास्तविक पत्रकारों को कैसे बदनाम कर रहे है|
निर्माण स्थल पहुंच कर मचाया उत्पाद:
शिकायतकर्ता और सरपंच प्रतिनिधि देवेन्द्र नायक ने बताया कि ग्राम पंचायत करपी में शासन की योजना के तहत चेक डेम का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार और क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिल सके। बीते 6 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 11 से 12 बजे के बीच दिनेश जायसवाल और सुनील टंडन नामक दो युवक निर्माण स्थल पर पहुंचे,वहां पहुंचते ही वे मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाने लगे। जब देवेन्द्र नायक ने उनसे उनका परिचय पूछा और फोटो लेने का कारण जानना चाहा, तो वे उग्र हो गए।
“50 हजार दो, नहीं तो खबर चलाकर कर देंगे बदनाम”
मान सम्मान से जुड़े सरपंच प्रतिनिधि ने डर व मान को धूमिल वही प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के कारण 20 हजार रु. को दे कर भी थे डर में!
पीड़ित के अनुसार, दोनों युवकों ने खुद को बहुत बड़ा पत्रकार बताते हुए रौब झाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने मजदूरों को काम बंद करने की धमकी दी और कहा कि— “अगर तुम हमें 50,000 रुपए नहीं दोगे, तो हम काम में कमियां निकालकर समाचार चलाएंगे और तुम्हें इतना बदनाम करेंगे कि तुम कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहोगे।” सरेआम दी जा रही इस धमकी और बदनामी के डर से घबराकर सरपंच प्रतिनिधि ने मौके पर ही दिनेश जायसवाल को 20,000 रुपए दे दिए,उसके साथ में एक व्यक्ति सुनील टंडन नामक भी रहे उपस्थित
एडिटेड फोटो भेजकर अब भी कर रहे ब्लैकमेल:
वसूली की हद तो तब पार हो गई जब 10 फरवरी को आरोपियों ने निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियर किशन पटेल के व्हाट्सएप पर एक ‘एडिटेड’ (छेड़छाड़ की गई) फोटो भेजी। इस फोटो के जरिए दबाव बनाते हुए आरोपियों ने बाकी बचे 30,000 रुपए की मांग की। लगातार मिल रही धमकियों और ब्लैकमेलिंग के इस कृत्य से परेशान होकर सरपंच प्रतिनिधि ने पुलिस की शरण ली है।
ग्रामीणों ने दी गवाही, पुलिस जांच में जुटी:
इस पूरी घटना के दौरान गांव के राजेश पटेल, उत्तरा निषाद, डोलमणी पटेल, दयाराम पटेल और कैलाश निषाद सहित कई अन्य ग्रामीण वहां मौजूद थे, जिन्होंने आरोपियों की बदतमीजी और वसूली के इस वाकये को अपनी आंखों से देखा है। पुलिस ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर कलंक:
यह मामला उन लोगों के चेहरे को बेनकाब करता है जो प्रेस आईडी कार्ड गले में लटकाकर विकास कार्यों में अड़ंगा डालते हैं और अवैध वसूली को अपना पेशा बना चुके हैं। ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी रोष है और उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई सरकारी काम में बाधा न डाल सके।
कुछ ऐसे सरपंच तो बहुत परेशान है ऐसे कृत्य करने वाले लोगों से लेकिन ग्राम पंचायत करपी के सरपंच पति ने हिम्मत दिखाया और 20 हजार रू. गवा कर थाने की शरण ली ताकि इंसाफ मिल सके।
![]()

