सारंगढ़ शिक्षा कार्यालय में घूसखोरी का गंभीर आरोपअवकाश और सर्विस बुक के नाम पर शिक्षकों से हजारों की अवैध वसूली
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सारंगढ़ /सारंगढ़–बिलाईगढ़ जिले के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है। विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ रेशमलाल कोशले एवं बीआरसी सत्येंद्र बसंत पर शिक्षकों व शिक्षिकाओं से खुलेआम घूस वसूली करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि अर्जित अवकाश, मेडिकल अवकाश, संतान पालन अवकाश, परीक्षा अनुमति आदेश तथा सर्विस बुक संधारण जैसे वैधानिक कार्यों की स्वीकृति के बदले हजारों रुपये की अवैध वसूली की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार शिक्षा कार्यालय में अवकाश जैसे संवैधानिक अधिकार भी अब “कीमत” पर मिलने लगे हैं। अर्जित अवकाश के लिए तीन हजार रुपये, एक माह के संतान पालन अवकाश के लिए पांच हजार रुपये और सर्विस बुक संधारण के लिए भी पांच हजार रुपये की राशि तय कर दी गई है। यही नहीं, परीक्षा से संबंधित अनुमति आदेशों के लिए भी हजारों रुपये की मांग की जाती है। आरोप है कि शिक्षकों को देर शाम तक कार्यालय में बैठाकर दबाव बनाया जाता है और रकम नहीं देने पर फाइलें रोक दी जाती हैं।
पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि वे मजबूरी में यह अवैध राशि देने को विवश हैं। यदि कोई शिक्षक विरोध करता है या पैसा देने से मना करता है तो उसके कार्य जानबूझकर लंबित रखे जाते हैं, जिससे मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। शिक्षकों में भय का माहौल है, इसी कारण अधिकांश लोग सामने आने से कतरा रहे हैं।
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षकों का कहना है कि जिन अधिकारियों को शासन द्वारा नियमित वेतन दिया जाता है, यदि वही अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से अवैध वसूली करें तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण भी है। अवकाश जैसे मूल अधिकार को पैसे से जोड़ना शिक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
मामले के सामने आने के बाद शिक्षक संगठनों में भारी आक्रोश है। संगठन निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की अपेक्षा जता रहे हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन और शासन पर टिकी हैं कि क्या इस कथित घूसखोरी प्रकरण में सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर शिक्षा कार्यालय में यह अवैध वसूली का खेल यूँ ही चलता रहेगा।
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