डोम पंडाल में गूंजेगी कविता, शब्दों से सजेगा सारंगढ़ का आसमान 11 जनवरी 2026 जब पुष्प वाटिका बनेगी विचार, सत्ता और साहित्य का महासंगम
1 min read
सारंगढ़-बिलाईगढ़।सारंगढ़ की मिट्टी एक बार फिर इतिहास लिखने को तैयार है। शब्दों की खुशबू, विचारों की चमक और संवेदनाओं की गूंज के साथ 11 जनवरी 2026 की तारीख सारंगढ़ के सांस्कृतिक कैलेंडर में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होने जा रही है। अवसर है प्रदेश स्तरीय पत्रकार कार्यशाला एवं रात्रिकालीन कवि सम्मेलन का, और मंच बनेगा गुरु घासीदास पुष्पबाटिका,
जहाँ कविता, पत्रकारिता और सत्ता तीनों एक साथ संवाद करेंगी।
डोम पंडाल की भव्यता, आधुनिक लाइटिंग की चमक और सुसज्जित मंच इन सबके बीच पुष्प वाटिका परिसर किसी महाकुंभ से कम नहीं दिखेगा। यह केवल सजावट नहीं, बल्कि उस विचार-यात्रा का दृश्य रूप है जो शब्दों के सहारे समाज तक पहुँचेगी। जैसे-जैसे शाम ढलेगी, वैसे-वैसे रोशनी के साथ भावनाएँ भी जगमगाएँगी और सारंगढ़ का आसमान कविता की तालियों से गूंज उठेगा।
एक मंच, अनेक धाराएँ—सत्ता, पत्रकारिता और साहित्य इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत है।
एक ही मंच पर सत्ता के प्रतिनिधि, प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार, युवा मीडियाकर्मी और देश-प्रदेश के ख्यातनाम कवि-साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति।
प्रदेश स्तरीय पत्रकार कार्यशाला में जहाँ जिम्मेदार पत्रकारिता, मीडिया की वर्तमान चुनौतियाँ, पत्रकारों की सुरक्षा और डिजिटल युग की सच्चाइयों पर गंभीर मंथन होगा, वहीं रात्रिकालीन कवि सम्मेलन में शब्दों की ऐसी रसधार बहेगी जो श्रोताओं को देर रात तक बाँधे रखेगी। यह संवाद केवल मंच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज की चेतना तक पहुँचेगा।
जब कविता बोलेगी, तब शहर सुनेगा
कवि सम्मेलन की रात यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं का उत्सव होगी। मंच से उठते शब्द कभी हँसाएँगे, कभी रुलाएँगे, तो कभी व्यवस्था पर सवाल बनकर दस्तक देंगे। प्रेम, प्रकृति, समाज और समय हर विषय कविता बनकर श्रोताओं के मन में उतर जाएगा। यह वह रात होगी जब तालियों की गूंज और शब्दों की चमक मिलकर सारंगढ़ को साहित्यिक राजधानी जैसा एहसास कराएगी।
सारंगढ़ का मान, साहित्य का सम्मान
यह आयोजन सारंगढ़ के लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि पहचान का विस्तार है। आयोजन समिति की मंशा साफ है। सारंगढ़ को पत्रकारिता और साहित्य का स्थायी मंच बनाना। सुव्यवस्थित बैठक व्यवस्था, अत्याधुनिक ध्वनि एवं प्रकाश प्रणाली, अतिथियों और दर्शकों की सुविधा हर स्तर पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि यह आयोजन स्मृतियों में बस जाए।
11 जनवरी 2026—एक शाम, जो इतिहास बन जाएगी
जैसे ही 11 जनवरी की शाम ढलेगी, गुरु घासीदास पुष्पबाटिका शब्दों, तालियों और भावनाओं की रोशनी से नहा उठेगी। यह आयोजन पत्रकारों और साहित्यकारों के साथ-साथ आमजन के लिए भी एक सांस्कृतिक उत्सव होगा।
जहाँ हर व्यक्ति खुद को शब्दों से जुड़ा महसूस करेगा।
निस्संदेह, यह प्रदेश स्तरीय पत्रकार कार्यशाला और रात्रिकालीन कवि सम्मेलन सारंगढ़ के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है।
जहाँ विचार बोलेंगे, शब्द चमकेंगे और सारंगढ़ का नाम दूर-दूर तक गूंजेगा।
![]()

