February 11, 2026

जमीन विवाद में फर्जी दस्तावेज़ का बड़ा खेल! बसना थाना में NCR दर्ज, रामकुमार भोई व जयंती भोई पर मारपीट, धमकी और कूट रचना के गंभीर आरोप

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जिला – महासमुंद //बसना थाना क्षेत्र अंतर्गत जमीन विवाद अब सिर्फ आपसी झगड़े तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फर्जी दस्तावेज़, फर्जी हस्ताक्षर और झूठे गवाहों के जरिए सुनियोजित साजिश का रूप ले चुका है। इस गंभीर मामले में आवेदिका समा भाई की शिकायत पर पुलिस ने असंज्ञेय अपराध (NCR) दर्ज कर पीड़िता को न्यायालय की शरण लेने की सलाह दी है।
प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज़ों के अनुसार NCR क्रमांक 0070/2025 दिनांक 22 दिसंबर 2025 को दर्ज की गई है। यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 174 के तहत की गई। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज विवरण के मुताबिक, घटना 13 दिसंबर 2025 को सुबह 07:45 बजे की है, जिसकी सूचना उसी दिन शाम 17:30 बजे थाना बसना में दी गई थी। शिकायत को सामान्य डायरी क्रमांक 007 में दर्ज किया गया।
रामकुमार भोई और जयंती भोई पर गंभीर आरोप
शिकायत में स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया गया है कि रामकुमार भोई एवं उनकी पत्नी जयंती भोई ने पुराने जमीन विवाद को आधार बनाकर न केवल गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि जमीनी दस्तावेज़ों में फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी गवाहों के जरिए छेड़छाड़ भी की। पीड़िता का कहना है कि यह सब एक पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत किया गया,
मानसिक प्रताड़ना, पुलिस की सीमाएं और न्यायालय की राह
पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला असंज्ञेय प्रकृति का पाए जाने पर BNSS की धारा 174 के तहत NCR दर्ज की गई। नियमों के अनुसार, असंज्ञेय अपराध में पुलिस न्यायालय की अनुमति के बिना विवेचना नहीं कर सकती। इसी कारण पुलिस ने शिकायतकर्ता को संबंधित न्यायालय से आदेश प्राप्त करने की सलाह दी है।
NCR पर थाना बसना के सहायक उप निरीक्षक पंकज बघेल के हस्ताक्षर अंकित हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायालय से निर्देश मिलते ही आगे की विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फर्जीवाड़े का नेटवर्क? ‘और भी लोग शामिल’
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिकायत में संकेत दिए गए हैं कि इस फर्जीवाड़े में केवल दो नाम नहीं, बल्कि और भी लोग शामिल हैं, जिन्होंने दस्तावेज़ों में कूट रचना को अंजाम देने में भूमिका निभाई।
👉 कौन हैं वे लोग?
👉 किसने किए फर्जी सिग्नेचर?
👉 कौन बने झूठे गवाह?
इन सभी सवालों के जवाब पार्ट-3 में सामने आने वाले हैं।
स्थानीय आक्रोश और बड़ा सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन विवादों में समय रहते सख्त कार्रवाई न होने से ऐसे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद फर्जी दस्तावेज़ों का यह जाल टूटेगा, या फिर पीड़ितों को यूं ही चक्कर काटने पड़ेंगे?
अब निगाहें न्यायालय के आदेश पर टिकी हैं—न्याय कब और कैसे मिलेगा, यह आने वाला समय बताएगा।
पार्ट-3 में होगा बड़ा खुलासा… जुड़े रहिए।

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