प्रशासन की आंखों पर पट्टी?मुगलीपाली चौक पर बेरीगेट, गोबरसिंहा–बिजनी डीपा चौक पर मौत का खुला न्योता!
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जिला – सारंगढ़ बिलाईगढ़ गोबरसिंहा / बरमकेला।सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन की कथनी और करनी के बीच का फर्क अगर कहीं देखना हो तो ग्राम पंचायत गोबरसिंहा और उसके आसपास के चौक इसका जिंदा उदाहरण हैं। एक तरफ मुगलीपाली गांव के प्रवेश से पहले स्थित मुगलीपाली बस स्टेशन चौक पर बाकायदा पुलिस-प्रशासन द्वारा बेरीगेट लगाकर यातायात को धीमा करने, दुर्घटनाओं से बचाने और सड़क क्रॉसिंग को सुरक्षित बनाने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे कहीं अधिक संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले गोबरसिंहा–बिजनी डीपा चौक और तोरेसिंहा चौक आज भी प्रशासनिक लापरवाही के कारण हादसों के मुहाने पर खड़े हैं।
मुगलीपाली बस स्टेशन चौक से दो प्रमुख मार्ग निकलते हैं—

एक मुगलीपाली की ओर और दूसरा बड़े आमाकोनी की ओर। इसी चौक पर लगाया गया प्रशासनिक बेरीगेट यह बताने के लिए काफी है कि यहां दुर्घटना की आशंका को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है। बेरीगेट के माध्यम से वाहनों की गति नियंत्रित की जा रही है, जिससे सड़क पार करने वाले लोगों को कुछ हद तक राहत मिलती है।
लेकिन सवाल यह है कि यही संवेदनशीलता गोबरसिंहा के साथ क्यों नहीं?
बार-बार गुहार, फिर भी सन्नाटा

गोबरसिंहा के ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार पुलिस और प्रशासन को मौखिक रूप से सूचना दी कि बिजनी डीपा चौक और तोरेसिंहा चौक पर तत्काल बेरीगेट, स्पीड ब्रेकर और चेतावनी संकेत लगाए जाएं। यह इलाके केवल साधारण चौक नहीं हैं, बल्कि इन्हें क्षेत्र की सबसे अधिक हलचल वाली जगह माना जाता है। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
बच्चों की जान खतरे में
इस मार्ग से होकर शासकीय स्कूलों में पढ़ने जाने वाले छोटे-छोटे बच्चे रोजाना जान जोखिम में डालकर सड़क पार करते हैं। तेज रफ्तार बाइक, कार और भारी वाहनों के बीच बच्चों का यूं सड़क पार करना किसी हादसे का इंतजार करने जैसा है। अभिभावक रोज डर के साये में बच्चों को स्कूल भेजते हैं, लेकिन प्रशासन को यह डर शायद दिखाई नहीं देता।
किसानों की ट्रैक्टर आवाजाही और बढ़ता जोखिम
दूसरी ओर, मुगलीपाली की तरफ वाले चौक से धान खरीदी के सीजन में किसानों के ट्रैक्टरों का भारी आवागमन होता है। यहां बेरीगेट लगाकर गति नियंत्रित की जा रही है, जो एक हद तक सही कदम है। लेकिन जिन चौकों से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और आम ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही होती है,
वहां सुरक्षा के नाम पर सन्नाटा क्यों है?
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
चयनात्मक सुरक्षा पर सवाल
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—
क्या सड़क सुरक्षा केवल कुछ चुनिंदा स्थानों के लिए है?
क्या गोबरसिंहा, बिजनी डीपा चौक और तोरेसिंहा के लोगों की जान की कीमत कम है?
अगर मुगलीपाली चौक पर बेरीगेट लगाया जा सकता है, तो उतनी ही या उससे अधिक जरूरत वाले स्थानों पर यह सुविधा क्यों नहीं? यह प्रशासनिक उदासीनता नहीं तो और क्या है?
चेतावनी भरे स्वर में मांग
गोबरसिंहा के ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि शीघ्र ही बिजनी डीपा चौक और तोरेसिंहा चौक पर बेरीगेट, स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और पुलिस की निगरानी नहीं की गई, तो किसी भी दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और पुलिस विभाग की होगी।
यह खबर केवल शिकायत नहीं, बल्कि एक अंतिम चेतावनी है।

आज भी समय है कि प्रशासन कागजी दावों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत को देखे और तुरंत कार्रवाई करे। वरना कल अगर कोई हादसा हुआ, तो जवाब सिर्फ सवालों से नहीं, बल्कि लोगों के गुस्से से देना पड़ेगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर किसी अनहोनी के बाद फाइलें खुलेंगी।
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