आश्रम में बच्चों के खाने के तेल में चींटियों की भरमार! जिम्मेदारों की निगरानी पर उठे सवालआदिवासी बालक आश्रम में भोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप, बच्चों को न पापड़ मिल रहा न अचार; सुबह के नाश्ते पर भी सवाल
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बरमकेला बड़े आमकोनी। आदिवासी बालक आश्रम की भोजन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आश्रम से सामने आई तस्वीर और मिली शिकायतों के अनुसार बच्चों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खाने के तेल में चींटियां भरी होने का आरोप है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह बच्चों के स्वास्थ्य और भोजन की गुणवत्ता के प्रति जिम्मेदारों की गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है।
बताया जा रहा है कि आश्रम में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन में न तो नियमित रूप से पापड़ दिया जाता है और न ही अचार। वहीं सुबह के नाश्ते को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत के अनुसार कई बार बच्चों को नाश्ता दिए जाने की जानकारी स्पष्ट नहीं होती और सीधे भोजन परोसने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह है कि बच्चों के लिए निर्धारित भोजन व्यवस्था और मेन्यू का पालन आखिर किस स्तर पर हो रहा है?
अधीक्षक के आने-जाने के समय पर भी सवाल
आश्रम अधीक्षक श्री विजय भारती के आने-जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि बारिश के दिनों में उनके आश्रम पहुंचने का समय कथित तौर पर सुबह 9 से 10 बजे के आसपास रहता है, जबकि अन्य दिनों में शाम करीब 5 बजे से आने-जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
यदि अधीक्षक के लिए निर्धारित ड्यूटी समय और वास्तविक उपस्थिति में अंतर है, तो उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी चार्ट और आश्रम की दैनिक गतिविधियों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
बच्चों के भोजन की गुणवत्ता की हो तत्काल जांच
सबसे बड़ा सवाल बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर है। खाने के तेल में चींटियां होने का आरोप अपने आप में जांच का विषय है। संबंधित विभाग को चाहिए कि आश्रम के रसोईघर, खाद्य सामग्री, तेल, राशन स्टॉक, भोजन मेन्यू, उपस्थिति रजिस्टर और अधीक्षक की उपस्थिति की तत्काल जांच कराई जाए।
बच्चे सरकारी संरक्षण में रह रहे हैं, इसलिए उनके भोजन और स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों को महज कागजों में दबाते हैं या मौके पर पहुंचकर वास्तविकता की जांच करते हैं।
बड़ा सवाल
जब बच्चों के भोजन की जिम्मेदारी तय है, तो खाने के तेल में चींटियां कैसे पहुंचीं? नाश्ता और निर्धारित भोजन कहां जा रहा है? और अधीक्षक की उपस्थिति का वास्तविक समय क्या है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद सामने आना चाहिए।
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