गरीब पर नोटिसों की बरसात, रसूखदारों पर मेहरबानी! गोबरसिंहा में अतिक्रमण पर दोहरा मापदंड, सवालों के घेरे में सरपंच और प्रशासन
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सारंगढ़-बिलाईगढ़/गोबरसिंहा। ग्राम पंचायत गोबरसिंहा में अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिनके पास अपनी जमीन के वैध दस्तावेज मौजूद हैं, उन्हें बार-बार नोटिस देकर प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए कथित अतिक्रमण पर प्रशासन की कार्रवाई धीमी या निष्प्रभावी दिखाई दे रही है।
मामले में यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि नए तालाब से होकर जाने वाले मार्ग तथा तालाब किनारे हॉस्टल और स्कूल की सुविधा के लिए बनाए गए सीसी रोड का उपयोग करने के बजाय लंबे समय तक दीपक पटेल की निजी भूमि से आवागमन किया जाता रहा। बाद में कथित रूप से उस रास्ते को छोड़कर वहां गड्ढा खोद दिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया। इसके बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से तहसीलदार को शिकायत भेजकर कब्जा हटाने की मांग की गई।
दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि पहले गोबरसिंहा में शांति भंग की आशंका का हवाला देकर चार कथित कब्जाधारियों के विरुद्ध कार्रवाई रुकवाई गई थी। हालांकि बाद में उन सभी को तहसील सरिया से बेदखली नोटिस जारी हुआ, लेकिन आज तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से यह चर्चा तेज है कि कहीं उन्हें राजनीतिक या स्थानीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा।
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा होता है जब आरोप लगाया जाता है कि हाल ही में स्वयं सरपंच द्वारा दुर्गा मंदिर बाजार के पास कथित अतिक्रमित भूमि पर लैंटर निर्माण कराया गया है। यदि यह आरोप सही है, तो फिर आम नागरिकों पर सख्ती और जनप्रतिनिधियों के मामलों में नरमी क्यों?
अब ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई कानून के आधार पर हो रही है या व्यक्ति विशेष के प्रभाव के आधार पर।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या कानून केवल कमजोर लोगों के लिए है?
क्या जनप्रतिनिधियों और उनके करीबी लोगों पर अलग नियम लागू होते हैं?
यदि अतिक्रमण गलत है, तो फिर सभी मामलों में समान कार्रवाई क्यों नहीं?
नोट: यह समाचार स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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