September 27, 2026

कुसुमबुड़ा-सारागांव मार्ग पर टूटा पुल बना मौत का जाल

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जिला ब्यूरो चीफ  -ओंकार शर्मा

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गरियाबंद / छुरा

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मानसून की पहली तेज बारिश में बह गया कुसुमबुड़ा–सारागांव–उड़ीसा सीमा मार्ग का पुल अब लोगों के लिए जानलेवा साबित होने लगा है। पुल टूटने के बाद भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण गुरुवार रात एक बड़ा हादसा हो गया। अंधेरे में पुल का टूटा हिस्सा दिखाई नहीं देने से 21 वर्षीय युवक गहरी खाई में जा गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मिथलेश कुमार (21 वर्ष), निवासी नावडिही बम्हनी, गुरुवार रात बम्हनी-कोसमी क्षेत्र से अपने घर लौट रहा था। रात के अंधेरे में उसे पुल का टूटा हिस्सा दिखाई नहीं दिया और वह सीधे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में युवक के हाथ-पैर एवं सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण वह मौके पर ही बेहोश हो गया।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल राहत कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों की मदद तथा 112 पुलिस की सहायता से घायल युवक को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुरा पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार युवक की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पहले भी जताई गई थी हादसे की आशंका

गौरतलब है कि मानसून की पहली बारिश में यह पुल बह गया था, जिससे सारागांव, चुरकीदादर, कोसमी, दुल्ला, नवापारा सहित उड़ीसा सीमा से लगे कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया था। इसके बाद विभिन्न समाचार माध्यमों ने लगातार चेतावनी दी थी कि दुर्घटनाओं से बचाव के लिए पुल के दोनों ओर मजबूत बेरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और रात्रिकालीन संकेतक लगाए जाएं।

सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी बनी हादसे की वजह

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा मौके पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। यदि समय रहते मजबूत बेरिकेडिंग और स्पष्ट चेतावनी संकेत लगाए गए होते, तो इस दुर्घटना को टाला जा सकता था। हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों ने की तत्काल कार्रवाई की मांग

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह सड़क छत्तीसगढ़ और उड़ीसा सीमा क्षेत्र को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, छात्र, किसान और व्यापारी आवागमन करते हैं। ऐसे में पुल टूटने के बाद सुरक्षा उपायों की अनदेखी आम लोगों की जान को जोखिम में डाल रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि पुल का पुनर्निर्माण होने तक तत्काल मजबूत बेरिकेडिंग, बड़े चेतावनी बोर्ड, रात्रिकालीन रिफ्लेक्टर एवं अन्य सुरक्षा संकेतक लगाए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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